National Men’s Mental Health Month 2025: चलो मर्दों से भी पूछें “क्या तुम ठीक हो?”

National Men’s Mental Health Month 2025 पर जानिए पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ, भारत में हालात, जागरूकता की ज़रूरत और कैसे हम एक संवेदनशील समाज बना सकते हैं।
लखनऊ 12 जून 2025: हर साल जून माह को National Men’s Mental Health Month के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत अमेरिका में हुई थी, ताकि पुरुषों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाई जा सके। भारत में यह महीना अभी जागरूकता के शुरुआती चरण में है, लेकिन यह बहुत जरूरी है क्योंकि पुरुषों की मानसिक स्थिति को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इस महीने का उद्देश्य है –
– पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना
– ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ जैसी सोच को तोड़ना
– पुरुषों को अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर करने के लिए सुरक्षित मंच देना
भारत में पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2016) के अनुसार भारत में 13.7% आबादी किसी न किसी मानसिक बीमारी से ग्रसित है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा पुरुषों का है।
- हर साल लगभग 1.39 लाख आत्महत्याएं भारत में होती हैं, जिनमें 70% से अधिक पुरुष होते हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात न कर पाना, सामाजिक अपेक्षाएं, पारिवारिक दबाव और आर्थिक तनाव पुरुषों में डिप्रेशन, एंग्जायटी और आत्महत्या के विचार पैदा करते हैं।
“मर्द मजबूत होते हैं” – एक भ्रामक सोच
समाज में यह धारणा बना दी गई है कि पुरुष रोते नहीं, टूटते नहीं, थकते नहीं। लेकिन सच्चाई यह है कि—
“मर्द बाहर से मजबूत, लेकिन अंदर से बेहद कोमल होते हैं।”
वे पिता, भाई, पति, बेटे, दोस्त—हर रूप में जिम्मेदारियों का भार उठाते हैं, लेकिन अक्सर कोई उन्हें यह नहीं पूछता कि “क्या तुम ठीक हो?”
क्या करें और क्या न करें – पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर
क्या करें:
- पुरुषों से भावनात्मक बातचीत करें
- उन्हें कमजोर महसूस कराने वाली बातों से बचें
- प्रोफेशनल मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेने को प्रोत्साहित करें
- परिवार और ऑफिस में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुला माहौल बनाएं
- उनके साथ समय बिताएं, उनकी बातें सुनें
क्या न करें:
- “तू लड़का है, तुझे क्या डिप्रेशन होगा?” जैसे संवाद न कहें
- उनके आंसुओं का मज़ाक न बनाएं
- उन्हें अकेला न छोड़ें जब वो चुप हो
- भावनाओं को ‘कमज़ोरी’ न कहें
Mental Health: सरकारी और सामाजिक पहल
भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई पहल हैं, लेकिन विशेष रूप से पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बेहद कम है।
प्रमुख योजनाएं:
- मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP)
- मनोज्ञान हेल्पलाइन (Tele MANAS)
इसके अलावा कई NGOs और हेल्पलाइन्स जैसे iCall, Fortis Stress Helpline पुरुषों के लिए सलाह और काउंसलिंग सेवा देती हैं।
National Men’s Mental Health Month सिर्फ एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि एक समाज को संवेदनशील और समावेशी बनाने की पहल है।
“हर मर्द मुस्कराता है, लेकिन कब चुपचाप रोता है, कोई नहीं जानता।”
अगर हम चाहते हैं कि हमारे पिता, भाई, पति और बेटे मानसिक रूप से स्वस्थ रहें, तो हमें सिर्फ सुनना होगा — बिना जजमेंट के, बिना सवाल के। यही सबसे बड़ा तोहफा है जो हम उन्हें दे सकते हैं।
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