Karnataka में RSS पर Ban की कोशिश !

Karnataka सरकार ने सरकारी स्कूल-कॉलेजों में RSS की गतिविधियों पर Ban लगाने का फैसला किया। मंत्री प्रियंक खरगे के बैन लगाने के पत्र और धमकी मिलने के दावे पर पढ़ें पूरी खबर।
बेंगलुरु 16 oct । कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लेते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेज परिसरों के भीतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों को प्रतिबंधित करने के नियम लाने का निर्णय लिया है। राज्य के मंत्री प्रियंक खरगे ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए इस कदम को नियमों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।
इस फैसले की पृष्ठभूमि में मंत्री प्रियंक खरगे द्वारा मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को लिखा गया एक पत्र है। खरगे ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को RSS तथा इसी तरह के अन्य संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में भाग लेने से सख्ती से रोका जाए। उन्होंने अपने इस आग्रह को कानूनी आधार देते हुए कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियमों का हवाला दिया था।
13 अक्टूबर को लिखे गए अपने पत्र में, प्रियंक खरगे ने नियमावली की विशिष्ट धाराओं को उद्धृत किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है, “कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या राजनीति में भाग लेने वाले किसी संगठन का सदस्य नहीं होगा, या उससे अन्यथा संबद्ध नहीं होगा और न ही किसी राजनीतिक आंदोलन या गतिविधि में भाग लेगा एवं न ही उसकी सहायता के लिए चंदा देगा या किसी अन्य तरीके से सहायता करेगा।” आपको बता दे कर्णाटक में कांग्रेस अंदरूनी गुट बाज़ी से जूझ रही है अभी कुछ समय पहले उप मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने RSS का मुख्य गीत कर्णाटक विधान सभा में गा दिया था और इसको सिद्धारमैया के लिए एक सीधी धमकी की तरह देखा गया था!
मंत्री ने अपने पत्र में आगे कहा कि इस संबंध में मौजूदा नियम स्पष्ट हैं, लेकिन हाल के दिनों में यह देखा गया है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी RSS द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा, “इसलिए राज्य के सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को RSS और ऐसे अन्य संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में भाग लेने से सख्ती से रोका जाना चाहिए।”
धमकी मिलने का दावा और बढ़ी सुरक्षा
इस मामले ने एक गंभीर मोड़ तब लिया जब मंत्री प्रियंक खरगे ने दावा किया कि उन्हें इस मुद्दे पर फोन करके धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई है। खरगे ने एक वायरल हुए वीडियो को साझा किया, जिसमें एक अज्ञात व्यक्ति उन्हें गालियां देता हुआ और गंभीर नतीजों की धमकी देता हुआ सुनाई दे रहा है।
इन घटनाओं के बाद, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मंत्री की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
Karnataka BJP की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रियंक खरगे के इस रुख की कड़ी आलोचना की है। भाजपा ने इस फैसले को ‘राजनीतिक रंजिश’ बताते हुए कहा है कि सरकार शिक्षण संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा बनाना चाहती है। पार्टी ने मंत्री को चुनौती देते हुए कहा है कि वह राज्य में RSS पर वास्तव में प्रतिबंध लगाने का प्रयास करके देखें।
यह मामला सरकारी संस्थानों की राजनीतिक तटस्थता बनाम संगठनों की गतिविधियों के अधिकार पर एक बड़ी बहस छेड़ने वाला साबित हो रहा है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कर्नाटक सरकार इस प्रस्तावित प्रतिबंध को लागू करने के लिए आगे क्या कदम उठाती है और इसके व्यापक राजनीतिक परिणाम क्या होते हैं। आज कर्णाटक सरकार जिस दौर से गुजर रही है उसे हर कदम पर केंद्र की सरकार की मदद की जरूरत पड़ेगी अब ये देखना दिलचस्प होगा की ये फैसला कितना भारी पड़ेगा !
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