लखनऊ में JP जयंती पर सियासी तनाव, JPNIC पर सख्त पाबंदी!

लखनऊ के JPNIC में अखिलेश यादव को रोकने के लिए सुरक्षा चाक-चौबंद। जानें क्यों दो साल से जयप्रकाश नारायण जयंती पर छिड़ा है सियासी संग्राम। पढ़ें पूरी खबर।
लखनऊ 11 Oct : जयप्रकाश नारायण जयंती पर फिर दिखा सियासी संग्राम, JPNIC में अखिलेश यादव को रोकने के लिए जुटाई गई डबल लेयर बैरिकेडिंग
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर से गहरे सियासी संघर्ष का गवाह बनी हुई है। पिछले दो सालों से इस दिन होने वाले हंगामे को देखते हुए प्रशासन ने इस बार लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को JPNIC परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए डबल लेयर बैरिकेडिंग की गई है और केंद्र तक पहुंचने वाले मुख्य मार्गों को भी बंद कर दिया गया है।
पिछले अनुभवों ने बढ़ाई सतर्कता
इस साल अखिलेश यादव की तरफ से JPNIC जाकर माल्यार्पण की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। समाजवादी पार्टी के अनुसार, इस बार कार्यक्रम पार्टी मुख्यालय में ही आयोजित किया गया है और JPNIC जाने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, प्रशासन ने पिछले वर्षों के घटनाक्रम को देखते हुए कोई कोताही नहीं बरती है। साल 2023 में अखिलेश यादव ने पुलिस की रोक के बावजूद JPNIC के एक गेट को फांदकर अंदर प्रवेश किया था और जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया था। वहीं, 2024 में उन्होंने अपने आवास पर ही यह कार्यक्रम संपन्न किया था।
इस पूरे मामले में दिलचस्प बात यह है कि वही गेट, जहां से अखिलेश यादव ने 2023 में प्रवेश किया था, अब पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। उस स्थान पर एक दीवार खड़ी कर दी गई है और टिन शीट से भी उसे मजबूती से घेर दिया गया है। परिसर के चारों ओर पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है, जिसका एकमात्र उद्देश्य JPNIC में किसी भी अवांछित प्रवेश को रोकना है।
सपा कार्यकर्ताओं ने रात के अंधेरे में किया माल्यार्पण
हालांकि, प्रशासन की सख्त पाबंदियों के बीच भी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता JPNIC के अंदर जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा तक पहुंचने में सफल रहे। खबरों के मुताबिक, दो सपा नेताओं ने रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए परिसर के अंदर प्रवेश किया और प्रतिमा पर माल्यार्पण करके वापस लौट आए। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसने एक बार फिर इस सियासी विवाद को हवा दे दी है।
दो सालों से जारी है टकराव का दौर
लखनऊ में जयप्रकाश नारायण की जयंती पर पिछले दो सालों से एक नियमित टकराव का माहौल देखने को मिल रहा है। एक तरफ सपा, जयप्रकाश नारायण के समाजवादी विरासत पर अपना दावा पेश करना चाहती है, वहीं प्रशासन उनके JPNIC पहुंचने पर रोक लगा रहा है। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने पहले भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि “अगर भाजपा JPNIC को बेचना चाहती है, तो समाजवादी पार्टी इसे खरीद लेगी।”
यह पूरा घटनाक्रम साफ दर्शाता है कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक विवादास्पद बिंदु बन गई है, जहां हर साल जयंती के अवसर पर सियासी जंग छिड़ने की पूरी आशंका बनी रहती है।
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