वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित, राज्यसभा में आज होगी पेशी

नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार देर रात वक्फ संशोधन विधेयक बहुमत से पारित कर दिया गया। विधेयक के पक्ष में 288 मत पड़े, जबकि 232 सांसदों ने विरोध किया। इस दौरान विपक्ष द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। अब यह विधेयक गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
विधेयक का उद्देश्य और प्रमुख संशोधन
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी धर्म में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। उन्होंने वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 40 का जिक्र करते हुए बताया कि पहले वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित कर सकता था और इसे चुनौती देने का कोई कानूनी विकल्प नहीं था। अब इस प्रावधान को हटा दिया गया है, जिससे कानूनी जटिलताएं कम होंगी।
विपक्ष के आरोप और शाह का जवाब
गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड को सरकारी संपत्तियों की लूट का लाइसेंस नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुगलकालीन कानूनों को आधुनिक भारत में जगह नहीं दी जा सकती। शाह ने यूपीए-2 सरकार द्वारा 2013 में किए गए संशोधनों को अराजकता फैलाने वाला बताया और कहा कि तत्कालीन राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने भी कड़े कानून की मांग की थी, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।
विपक्ष की आपत्ति और सरकार की सफाई
लोकसभा में विपक्षी दलों ने विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए विरोध किया, लेकिन रिजिजू ने तर्क दिया कि यदि 1954 से वक्फ कानून वैध है, तो उसमें संशोधन असंवैधानिक कैसे हो सकता है? उन्होंने आश्वासन दिया कि मुस्लिम समुदाय की कोई जमीन नहीं छीनी जाएगी और विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है।
क्या होगा आगे?
अब यह विधेयक राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। यदि वहां से भी इसे मंजूरी मिलती है, तो यह कानून बन जाएगा। इस विधेयक के पारित होने से वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता और प्रबंधन में सुधार आने की उम्मीद है।
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