गोरखपुर में यूपी के पहले Ayush University का लोकार्पण, राष्ट्रपति मुर्मु (Murmu)ने कहा – “आयुर्वेद भारत की विश्व को अमूल्य सौगात”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (Murmu) ने गोरखपुर में यूपी के पहले Ayush Universityका उद्घाटन किया। उन्होंने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन विरासत बताते हुए इसके वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला।
गोरखपुर 1 July (यूपी)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (Murmu) ने मंगलवार को गोरखपुर के भटहट-पिपरी स्थित प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय (Ayush University) का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने आयुर्वेद को भारत की ओर से विश्व समुदाय को दी गई “अमूल्य सौगात” बताया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने कहा कि यह विश्वविद्यालय न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की चिकित्सा सेवाओं में मील का पत्थर साबित होगा।
“गोरखपुर की धरती तपस्या और अध्यात्म की भूमि”
राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (Murmu) ने अपने संबोधन में गोरखपुर को तपस्या, साधना और अध्यात्म की धरती बताया। उन्होंने कहा, “आदि गुरु शंकराचार्य और बाबा गोरखनाथ जैसे महापुरुषों ने इस भूमि को पवित्र किया है। यहां के लोगों के लिए यह गर्व का विषय है कि वे इस संस्कृति से जुड़े हैं।” उन्होंने नाथ योगियों के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान की भी चर्चा की।
योग से “अथक और निद्राजीत” बनने की प्रेरणा
राष्ट्रपति मुर्मु ने योग के महत्व पर विशेष जोर देते हुए एक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे जनसेवा के क्षेत्र में आईं, तो उनसे कहा गया कि उन्हें “अथक” बनना होगा—यानी बिना थके काम करना होगा। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने बताया कि योग के माध्यम से आठ घंटे की नींद तीन घंटे में पूरी की जा सकती है। इसलिए योग ‘अथक और निद्राजीत’ बनने में सहायक है।”
“आयुर्वेद पूरी तरह वैज्ञानिक, दवाएं कभी खराब नहीं होतीं”
राष्ट्रपति ने आयुर्वेद को वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति बताते हुए कहा कि “एलोपैथी की दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दवाएं कभी खराब नहीं होतीं।” उन्होंने दिनचर्या, ऋतुचर्या और रात्रिचर्या का पालन करने पर जोर दिया और कहा कि स्वस्थ जीवनशैली ही भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में सक्षम बनाएगी।
मुख्यमंत्री योगी ने दिया श्रेय
राष्ट्रपति ने गोरखपुर के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास की सराहना करते हुए इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि को दिया। उन्होंने कहा कि उनके अथक परिश्रम के कारण ही प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं मिल रही हैं।
गीताप्रेस ने भेंट की उड़िया भाषा में भागवत गीता
समारोह के दौरान गीताप्रेस गोरखपुर ने राष्ट्रपति को उड़िया भाषा में लिखी श्रीमद्भागवत गीता और भागवत कथा की पुस्तकें भेंट कीं। राष्ट्रपति ने इन्हें “गोरखपुर की अमूल्य सौगात” बताते हुए कहा कि वे इन्हें सदैव स्मृति में संजोकर रखेंगी।
“आयुष विश्वविद्यालय देश के लिए मील का पत्थर”
राष्ट्रपति ने कहा कि यह विश्वविद्यालय आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और सिद्धा जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा, “2014 में केंद्र सरकार ने आयुष मंत्रालय और 2017 में यूपी सरकार ने आयुष विभाग बनाकर इन पद्धतियों को नई ऊर्जा दी। आज का यह समारोह आयुर्वेद के पुनर्जागरण का उत्सव है।”
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