Election Commission : SIR, 12 राज्यों में शुरू !

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Election Commission : SIR, 12 राज्यों में शुरू !

Election Commission , ने 12 राज्यों में SIR लागू । बिहार के अनुभव के आधार पर BLOs के लिए नए दिशा-निर्देश जारी। जानें पूरी खबर।

नई दिल्ली 28 Oct : अगले 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होने वाली विशेष गहन निर्वाचन नामावली सुधार (SIR) प्रक्रिया में चुनाव आयोग (Election Commission) ने कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। यह बदलाव हाल ही में बिहार में पूरी हुई इसी प्रक्रिया के अनुभवों के आधार पर किए गए हैं, ताकि प्रक्रिया को और अधिक कारगर एवं नागरिक-हितैषी बनाया जा सके।

Election Commission ने 24 जून को जारी अपने आदेश के अनुसार, इन 12 राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को एक नोटिस जारी कर नई प्रक्रिया से अवगत कराया है। इनमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि गणनाकर्ता (एन्युमरेटर) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं से किसी भी प्रकार के दस्तावेज़ एकत्र नहीं किए जाएंगे।

बिहार के अनुभव से सीख

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि बिहार में हुई प्रक्रिया के दौरान यह पाया गया कि अधिकांश लोग पिछली SIR की मतदाता सूची में ही मौजूद थे। दस्तावेज़ न मांगने का निर्णय इसी अनुभव के आधार पर लिया गया है, जिससे जनता को होने वाली असुविधा को कम किया जा सके। इसके साथ ही, अब बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को अधिक सक्रिय भूमिका दी गई है।

Election Commission : SIR, 12 राज्यों में शुरू !

बीएलओ की भूमिका में बदलाव

चुनाव आयोग के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि किसी मतदाता का गणना फॉर्म वापस नहीं आता है, तो बीएलओ को पास के मतदाताओं से पूछताछ करके इसका संभावित कारण पता लगाना होगा। इन कारणों में मतदाता की मृत्यु, नाम की नकल (डुप्लिकेशन), या स्थानांतरण जैसे points शामिल हो सकते हैं। बीएलओ को इसकी एक रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

गणना फॉर्म में हुए सुधार

आयोग ने गणना फॉर्म और घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन फॉर्म) के प्रारूप में भी बदलाव किए हैं। दोनों फॉर्म में अब एक नया कॉलम जोड़ा गया है। इस कॉलम में यह जानकारी दर्ज करनी होगी कि जब राज्य में पिछली एसआईआर तैयार की गई थी, तब क्या मतदाता का नाम और उसके माता-पिता या अभिभावक का नाम मतदाता सूची में मौजूद था या नहीं।

बिहार की प्रक्रिया से अलग, इस बार सभी 12 राज्यों की मतदाता सूचियां मतदाताओं और उनके माता-पिता के नाम मैप करने के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे डुप्लिकेट एंट्री और गलतियों को रोकने में मदद मिलेगी।

नए मतदाता पंजीकरण की सुविधा

प्रक्रिया में एक और बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब नए मतदाताओं का पंजीकरण भी घर-घर गणना के दौरान ही एक साथ किया जाएगा। इसके लिए बीएलओ के पास कम से कम 30 खाली फॉर्म-6 और खाली घोषणा पत्र होंगे, ताकि यदि कोई व्यक्ति खुद को नया मतदाता के रूप में पंजीकृत करना चाहे, तो बीएलओ तुरंत उसे फॉर्म उपलब्ध करा सके।

इन सभी बदलावों का मुख्य उद्देश्य विशेष गहन निर्वाचन नामावली सुधार की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, कुशल और जन-केंद्रित बनाना है। चुनाव आयोग की यह पहल मतदाता सूचियों की शुद्धता बनाए रखने और देश के प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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