दिल्ली शराब नीति मामला: केजरीवाल-सिसोदिया बरी, कोर्ट ने CBI को लगाई फटकार

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Delhi Excise Policy Case

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया। जानें क्या था पूरा मामला, कैसे शुरू हुआ विवाद और कोर्ट ने क्या कहा?

नई दिल्ली: दिल्ली की Delhi Excise Policy Case में शुक्रवार 27 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला चार साल से अधिक समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद आया है, जिसमें CBI और ED ने गंभीर आरोप लगाए थे।

अदालत ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि CBI ठोस सबूत पेश करने में विफल रही और केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि आपराधिक साजिश साबित करने में एजेंसी पूरी तरह नाकाम रही, जिसके चलते चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया।

क्या थी Delhi Excise Policy 2021-22?

Delhi Excise Policy Case की जड़ें नवंबर 2021 में लागू की गई नई आबकारी नीति से जुड़ी हैं। दिल्ली सरकार ने शराब की चोरी और अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए इस नीति में सुधार किया था। इससे पहले शराब की खुदरा बिक्री सरकारी निगमों और निजी कंपनियों के बीच बंटी हुई थी, जिससे सरकार को सालाना करीब 4,500 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था।

नई नीति के तहत खुदरा कारोबार का पूरी तरह निजीकरण कर दिया गया। सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा था। इसके तहत शहर के सभी 272 नगरपालिका वार्डों में कम से कम दो शराब की दुकानें खोलने की योजना थी। लेकिन यह नीति विवादों में घिर गई जब CBI और ED ने अनियमितताओं के आरोप लगाए।

CBI और ED के मुख्य आरोप

जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि आबकारी नीति को संशोधित करते समय कई अनियमितताएं की गईं। सीबीआई के अनुसार, लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, लाइसेंस शुल्क में छूट दी गई और बिना सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के एल-1 लाइसेंस बढ़ाए गए।

आरोप था कि लाभार्थियों ने आरोपित अधिकारियों को अवैध रूप से लाभ पहुंचाया और हिसाब-किताब में गड़बड़ी की। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करते हुए दावा किया कि इस नीति से साउथ लॉबी के कारोबारियों को फायदा हुआ और बदले में आम आदमी पार्टी के नेताओं को करीब 100 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली। कोरोना काल में निविदा लाइसेंस शुल्क पर छूट से सरकारी खजाने को 144.36 करोड़ रुपये के नुकसान का भी आरोप लगाया गया।

कैसे शुरू हुआ यह मामला?

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत जुलाई 2022 में हुई जब दिल्ली के मुख्य सचिव ने नई आबकारी नीति में गंभीर अनियमितताओं की रिपोर्ट दी। इसके बाद 22 जुलाई 2022 को उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। दिल्ली सरकार ने 31 जुलाई 2022 को यह नीति रद्द कर दी और पुरानी नीति बहाल कर दी।

17 अगस्त 2022 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली। इसके बाद 26 फरवरी 2023 को मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया। ईडी ने 9 मार्च 2023 को उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। 21 मार्च 2024 को अरविंद केजरीवाल को ईडी ने गिरफ्तार किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मई 2024 में केजरीवाल को लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी और सितंबर 2024 में सीबीआई मामले में भी जमानत मिल गई।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस लंबी कानूनी प्रक्रिया पर विराम लगाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि Delhi Excise Policy Case में CBI ठोस सबूत पेश करने में विफल रही और केवल आरोपों के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

इस फैसले के बाद दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया और इसे सच्चाई की जीत बताया। वहीं, भाजपा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई की है। इस फैसले से साफ हो गया है कि इस पूरे मामले में राजनीतिक द्वेष के चलते नेताओं को फंसाया गया था।

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