Bihar में मोदी मिशन का समापन: विकास की बरसात या सियासत का संकेत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Bihar Yatraके समापन के साथ राज्य को कई विकास परियोजनाएं मिलीं, लेकिन इस यात्रा ने चुनावी राजनीति को भी नई दिशा दी। जानिए बिहार में इस दौरे का असली असर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुचर्चित Bihar Yatra 30 मई 2025 को समाप्त हो गई। इस एक महीने की यात्रा के दौरान 13,480 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ। मधुबनी से लेकर पटना तक, PM Modi ने Bihar को नई उम्मीदों का संदेश दिया।
विकास की बड़ी घोषणाएं:
- ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत कई रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण
- ‘नमो भारत रैपिड रेल’ की नींव, जिससे बिहार से दिल्ली तक सफर अब तेज़ होगा
- AIIMS दरभंगा, IIT पटना विस्तार, और ग्रामीण पेयजल योजनाएं
- किसानों को पीएम-किसान योजना की नई किश्तें
- शहरी बुनियादी ढांचे में 4800 करोड़ की योजनाएं, जिसमें सड़क, नाला, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट्स शामिल हैं
राजनीतिक संदेश:
प्रधानमंत्री मोदी ने हर रैली में “नया बिहार, विकसित बिहार” की बात दोहराई। लेकिन कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह बिहार की भविष्य की राजनीति की नींव भी रख रही थी।
- नीतीश कुमार की भूमिका यात्रा में सीमित रही, जिससे यह संकेत मिला कि भाजपा अब JDU से दूरी बना रही है।
- जनता दल (यू) के भीतर भी बेचैनी देखने को मिली।
- भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बढ़ी सक्रियता से यह स्पष्ट है कि अब पार्टी “अपने दम पर” चुनावी तैयारी में जुट चुकी है।
विजुअल और जनसंपर्क:
- मोदी की रैलियों में जबरदस्त भीड़, कैमरा एंगल से लेकर सोशल मीडिया तक ‘मोदी मैजिक’ छाया रहा।
- महिलाओं, युवाओं और किसानों को मुख्य फोकस में रखा गया।
क्या Bihar अब crossroads पर खड़ा है ?
बिहार को भले ही पीएम मोदी की यात्रा से योजनाएं और घोषणाएं मिली हों, लेकिन सबसे बड़ी देन शायद यह रही कि राज्य की राजनीति अब एक नए मोड़ पर आ चुकी है। अब सवाल ये है की क्या बिहार 2025 में नई राजनीतिक दिशा अपनाएगा?
क्या यह नीतीश युग का अंतिम पड़ाव है या भाजपा का एकल राज का आरंभ?
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