Bangladesh में हिंदू अत्याचार: विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने गठित की ‘मुक्ति वाहिनी’

Bangladesh में हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार के विरोध (Bangladesh Hindu persecution) में विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने बनाई ‘बांग्लादेश हिंदू मुक्ति वाहिनी’। पढ़ें पूरी खबर।
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लखनऊ 24 Dec : बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार बढ़ रहे हमलों, धार्मिक उत्पीड़न एवं हिंसक घटनाओं के विरोध में विश्व हिंदू रक्षा परिषद (World Hindu Raksha Parishad) ने एक बड़ी और साहसिक पहल की है। संगठन ने ‘बांग्लादेश हिंदू मुक्ति वाहिनी’ के गठन की घोषणा करते हुए बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन के प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय ने पत्रकारों से बातचीत में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की दयनीय और भयमय स्थिति पर गहरी चिंता एवं आक्रोश व्यक्त किया। राय ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश में हिंदुओं के साथ व्यवस्थित रूप से हो रहा कत्लेआम, जबरन धर्मांतरण और सम्पत्ति हड़पने की घटनाओं के बावजूद विश्व समुदाय की भूमिका केवल बयानबाजी तक सीमित है, जो अत्यंत निराशाजनक है।
Bangladesh Hindu persecution
गोपाल राय ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति दिन-प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। मंदिरों को तोड़ा जा रहा है, महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं, और लोगों को जान से मार दिया जा रहा है। दीपू दास जैसे निर्दोष लोगों की हत्या के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन न्याय का पलड़ा झुकता नज़र नहीं आता। ऐसे में, केवल नैतिक समर्थन दिखाना पर्याप्त नहीं है।”
एक ऐतिहासिक प्रेरणा और एक नई पहल
इस संकट के समाधान के तौर पर घोषित ‘बांग्लादेश (Bangladesh )हिंदू मुक्ति वाहिनी’ के गठन के पीछे 1971 के स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक प्रेरणा बताई गई है। गोपाल राय ने याद दिलाया कि उस समय भारत के सहयोग से गठित ‘बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी’ ने देश की आज़ादी में निर्णायक भूमिका निभाई थी। उसी भावना को आज हिंदुओं की सुरक्षा, अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के संघर्ष के लिए पुनर्जीवित किया जा रहा है।
राय के अनुसार, इस वाहिनी का प्राथमिक उद्देश्य बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा, भय और असुरक्षा के वातावरण के विरुद्ध एक सशक्त आवाज़ बनना, पीड़ितों को कानूनी सहायता प्रदान करना और इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुखरता से उठाना है।
भारत सरकार से अनुमति और वैश्विक समुदाय से मांग
विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने भारत सरकार से एक ठोस अनुरोध किया है। गोपाल राय ने मांग की कि केंद्र सरकार को ‘बांग्लादेश हिंदू मुक्ति वाहिनी’ को आवश्यक अनुमति और मान्यता प्रदान करनी चाहिए, ताकि वह अपने मानवीय एवं धार्मिक अधिकारों के संरक्षण के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।
इसके साथ ही, संगठन ने भारत सरकार एवं वैश्विक समुदाय के समक्ष कड़े कदम उठाने की मांग रखी है। इनमें बांग्लादेश को दी जाने वाली सभी प्रकार की आर्थिक सहायता (विदेशी सहायता) को तत्काल प्रभाव से रोकना और धार्मिक उत्पीड़न के लिए बांग्लादेश सरकार पर तुरंत आर्थिक एवं कूटनीतिक प्रतिबंध लगाने की अपील शामिल है।
न्याय के लिए एक नया संकल्प
विश्व हिंदू रक्षा परिषद की यह पहल दर्शाती है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की पीड़ा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपेक्षित नहीं रह सकती। ‘बांग्लादेश हिंदू मुक्ति वाहिनी’ का गठन केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है – हिंदू समुदाय की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों के लिए अब एक संगठित और सक्रिय संघर्ष शुरू हो चुका है। यह देखना अगला चुनौतीपूर्ण कदम होगा कि भारत सरकार और वैश्विक मानवाधिकार संगठन इस मांग पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने की दिशा में कितना गंभीर हैं। गोपाल राय ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि दीपू दास सहित सभी पीड़ित हिंदुओं के लिए न्याय पाने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
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