Azam Khan आज़ाद ! 23 महीने बाद सीतापुर जेल से मुक्ति, रामपुर में जश्न!

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Azam Khan 23 महीने बाद सीतापुर जेल से रिहा। जानें उनकी राजनीतिक चुनौतियों और भविष्य की रणनीति के बारे में।

रामपुर 24 Sep। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान मंगलवार 23 sep को सीतापुर जेल से रिहा हो गए। लगभग 23 माह तक कारावास में रहने के बाद उनकी रिहाई पर उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। जेल परिसर से बाहर निकलते ही आजम खान का भव्य स्वागत किया गया और उन्हें लेकर समर्थकों का एक बड़ा काफिला छह दर्जन से अधिक गाड़ियों के साथ रामपुर के लिए रवाना हुआ।

हालांकि, रिहाई के इस जश्न के बीच एक बड़ा सवाल यह है कि क्या आजम खान और उनके परिवार का भविष्य का राजनीतिक सफर आसान होगा? राजनीतिक विश्लेषकों और कानूनी जानकारों का मानना है कि उनके सामने चुनौतियां ही चुनौतियां हैं।

Azam Khan :कानूनी अवरोध 2027 के चुनाव में बड़ी बाधा

आजम खान, उनकी पूर्व सांसद पत्नी तंजीन फातिमा और पूर्व विधायक पुत्र अब्दुल्ला आजम—तीनों को विभिन्न मामलों में अदालतों द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। भारतीय चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अदालत द्वारा सजा होने की स्थिति में एक निश्चित अवधि के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध होता है। इस आधार पर, विशेषज्ञ मानते हैं कि 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में तीनों का चुनाव लड़ना लगभग असंभव है।

2019 से शुरू हुई कानूनी मुश्किलें

आजम खान के खिलाफ मुकदमों का सिलसिला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान शुरू हुआ, जब उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह सहित कुछ अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण दिया था। इसके बाद से उनके खिलाफ रामपुर और अन्य जिलों में कुल 104 मुकदमे दर्ज किए गए। अब तक 12 मामलों में फैसला हो चुका है, जिनमें से कुछ में उन्हें सजा हुई है तो कुछ में वे बरी भी हुए हैं। भड़काऊ भाषण, मशीन चोरी, फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जैसे मामलों में उन्हें सजाएं हो चुकी हैं, जिसके चलते उनकी विधायकी भी जा चुकी है।

परिवार के नए चेहरे हो सकते हैं सामने

ऐसे में, आजम खान के राजनीतिक परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारे जाने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आजम खान के दूसरे पुत्र अदीब आजम या उनकी पुत्रवधू सिदरा आजम भविष्य में चुनाव लड़ सकते हैं। यह रणनीति परिवार की सियासी विरासत को बनाए रखने का एक मार्ग साबित हो सकता है।

सपा से नाता बरकरार, अखिलेश ने जताया समर्थन

रिहाई के बाद आजम खान ने स्पष्ट किया है कि वह समाजवादी पार्टी के साथ ही रहेंगे। इससे उनके किसी अन्य दल, विशेषकर बसपा में शामिल होने की अटकलों पर विराम लग गया है। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान को पार्टी का ‘स्तंभ’ बताते हुए कहा है कि सपा की सरकार बनने पर उनके खिलाफ लगे मुकदमों को वापस लिया जाएगा और इन मामलों को कराने वालों की जांच की जाएगी।

निष्कर्षतः, आजम खान की जेल से रिहाई निस्संदेह उनके लिए और उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है, लेकिन उनकी राजनीतिक वापसी का रास्ता कानूनी दांव-पेच और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा। अगले कुछ महीने यह तय करेंगे कि आजम खान का परिवार अपनी राजनीतिक पकड़ को कैसे बनाए रखता है।

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