Sahara को अब Adani Group का “सहारा”!

लखनऊ का Sahara गंज मॉल और Sahara शहर अब Adani Group के हो सकते हैं। जानें इस मेगा डील का शहर और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा प्रभाव। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।
लखनऊ 27 Sep : Adani Group सहारा इंडिया समूह की प्रमुख संपत्तियों, विशेष रूप से लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित सहारा गंज मॉल और सहारा शहर, के अधिग्रहण के करीब पहुंच गया है। यह संभावित डील दशकों से अटकी पड़ी इन विशाल संपत्तियों के भविष्य के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।
लखनऊ की पहचान रहे Sahara गंज मॉल और Sahara शहर कई वर्षों से एक अनिश्चित स्थिति में थे। Sahara गंज मॉल कभी बड़े ब्रांड्स और सप्ताहांत की भीड़ का केंद्र हुआ करता था, जबकि सहारा शहर समूह के गृहनगर के गौरव का प्रतीक था। अब ये दोनों ही स्थान अडानी बैनर तले एक नए जीवन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शहरवासियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह डील शहर की इन दो सबसे चर्चित जगहों में फिर से जान फूंक पाएगी?

क्या है पूरी डील?
प्रस्तावित ‘सिंगल-ब्लॉक’ बिक्री में लखनऊ का 5.7 एकड़ का सहारा गंज मॉल और 170 एकड़ का सहारा शहर शामिल है। इसके अलावा, इस डील में देश भर की 88 अन्य संपत्तियां भी शामिल हैं, जिनमें महाराष्ट्र का एम्बी वैली, मुंबई का सहारा स्टार होटल और अन्य राज्यों में फैली कई अन्य प्रॉपर्टीज शामिल हैं।
इस डील का क्यों है महत्व?
यह कोर्ट-निरीक्षित, एकमुश्त बिक्री का प्रस्ताव पिछले एक दशक से अटकी संपत्तियों के मुद्रीकरण के गतिरोध को तोड़ सकता है। सहारा की संपत्तियों को बेचने के पिछले प्रयास या तो अदालतों में फंस गए थे या फिर विश्वसनीय खरीदारों को आकर्षित करने में विफल रहे थे। अडानी ग्रुप के साथ यह वन-शॉट डील समूह के लेनदारों के लिए आगे का रास्ता साफ करने का वादा करती है।
लखनऊ के लिए क्या मायने हैं इसके?
शहर के निवासियों और व्यापारिक जगत के लिए, यह डील आशा की एक किरण है। सहारा गंज मॉल, जो कभी शहर का सबसे व्यस्त शॉपिंग सेंटर था, पिछले कुछ वर्षों में अपना चमक खो चुका है। एक मजबूत और सक्रिय प्रबंधन के तहत, मॉल फिर से खरीदारी और मनोरंजन का केंद्र बन सकता है। इसी तरह, सहारा शहर के विशाल परिसर के विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिससे लखनऊ के इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा मिल सकता है।
आगे की राह
हालांकि यह डील अभी पूरी तरह से अंतिम नहीं हुई है, लेकिन अडानी ग्रुप की इस ओर बढ़ाया गया कदम एक सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अधिग्रहण सफल होता है, तो इससे न केवल लखनऊ की शहरी अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि देश भर में फंसी सहारा की अन्य संपत्तियों के भविष्य का रास्ता भी साफ होगा। पूरा शहर अब इस डील के अगले चरण की प्रतीक्षा कर रहा है, यह जानने के लिए कि क्या लखनऊ के इन दो लैंडमार्क को नया जीवन मिल पाएगा।
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