लखनऊ में ATS ने पकड़ी बांग्लादेशी महिला नरगिस, हिन्दू बन कर रहती थी।

लखनऊ ATS ने बांग्लादेशी महिला नरगिस को गिरफ्तार किया। वह 2006 से फर्जी दस्तावेजों से भारत में रह रही थी। हिंदू बनकर पूजा-पाठ में सक्रिय थी। जानें पूरा मामला।
लखनऊ: ठाकुरगंज इलाके से ATS ने गिरफ्तार की बांग्लादेशी महिला, फर्जी पहचान से जी रही थी जिंदगी
लखनऊ, 30 nov। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके से आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने एक बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया है। इस महिला के पास फर्जी आधार कार्ड और अन्य नकली दस्तावेज बनवाकर खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के गंभीर आरोप हैं। पुलिस के अनुसार, यह महिला पिछले 17 वर्षों से अवैध रूप से भारत में रह रही थी और हिंदू पहचान अपनाकर समाज में घुली-मिली हुई थी।
कौन है नरगिस?
गिरफ्तार महिला की पहचान नरगिस उर्फ जैसमीन उर्फ निर्मला के रूप में हुई है। एटीएस द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ है कि नरगिस मूल रूप से बांग्लादेश के जलोंकाठी जिले के सदर उबावकाठी स्थित नाबेगांव क्रक्श बाजार की निवासी है। दस्तावेजों के अनुसार, वह साल 2006 में अपने तत्कालीन बांग्लादेशी पति के साथ पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में अवैध रूप से घुसी थी।
क्या थी नरगिस की मोडस ऑपरेंडी?
ATS की जांच से इस मामले की जटिल श्रृंखला सामने आई है। कोलकाता में कुछ समय रहने के बाद नरगिस ने अपने बांग्लादेशी पति को तलाक दे दिया। इसके बाद वह उत्तर प्रदेश के बलिया पहुंची, जहां उसकी मुलाकात हरिओम आनंद नामक एक शख्स से हुई। नरगिस ने खुद को जैसमीन बताते हुए हरिओम से हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली और उसके साथ लखनऊ आ गई।
हरिओम आनंद ने ही उसके लिए फर्जी पहचान पत्र बनवाने में मदद की। हरिओम ने उसे कार और स्कूटी जैसी सुविधाएं भी दिलवाईं। हालाँकि, नरगिस का दावा है कि जब हरिओम उसे बेचना चाहा, तो उसने हरिओम को छोड़ दिया। इसके बाद एक मौलाना ने उसकी मुलाकात काकोरी के दुर्गागंज अमेठिया निवासी शमीर नामक व्यक्ति से करवाई और दोनों का निकाह हुआ। गिरफ्तारी के वक्त नरगिस, शमीर के साथ ही ठाकुरगंज के बरौरा हुसैनबाढ़ी इलाके में एक किराए के मकान में रह रही थी।
पूजा-पाठ से बनाई थी विश्वसनीयता
नरगिस ने अपनी असली पहचान को पूरी तरह से छुपाकर रखा था। वह अपने आस-पास के लोगों के सामने खुद को ‘निर्मला’ के रूप में पेश करती थी। उसने हिंदू रीति-रिवाजों का पूरी तरह से पालन किया और पूजा-पाठ में सक्रिय रहती थी। पड़ोसियों ने बताया कि दिवाली जैसे त्योहारों पर वह पूजा में शामिल होती थी, जिसके कारण किसी को उसपर कभी शक नहीं हुआ। मकान मालिक को उसने कोई आधार कार्ड नहीं दिखाया था, लेकिन उसके व्यवहार ने सभी को भरमाए रखा।
फर्जी दस्तावेजों का खुलासा
एटीएस की छानबीन में नरगिस के पास से दो फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं। एक कार्ड जैसमीन नाम से तो दूसरा निर्मला के नाम से बना हुआ था। इन दस्तावेजों के जरिए ही वह लंबे समय तक अवैध रूप से भारत में रहने और यहाँ की नागरिक सुविधाओं का लाभ उठाने में सफल रही। एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि इन फर्जी आधार कार्डों को कहाँ और कैसे बनवाया गया था। फर्जी दस्तावेज बनवाने के आरोप में हरिओम आनंद को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
ठाकुरगंज: अवैध गतिविधियों का अड्डा?
यह पहली बार नहीं है जब ठाकुरगंज इलाके से ऐसे शख्स की गिरफ्तारी हुई है। इससे पहले भी एटीएस ने इसी थाना क्षेत्र से एक आतंकी को पकड़ा था, जो एक डॉक्टर के मकान में रह रहा था। इस घटना ने एक बार फिर इस इलाके को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है और स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं कि आखिर उनके क्षेत्र में इतने लंबे समय तक अवैध रूप से रह रहे लोगों की जानकारी उन्हें क्यों नहीं थी।
चल रही है गहन पूछताछ
एटीएस द्वारा नरगिस और उसके साथी शमीर के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई है। दारोगा रवि प्रकाश ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है। इंस्पेक्टर ठाकुरगंज ओमवीर सिंह ने बताया कि एटीएस की मदद से तथ्य एकत्रित कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या नरगिस की कोई और शातिर योजना तो नहीं थी या वह किसी और बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।
यह मामला देश में बढ़ रही अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के चलन की एक गंभीर झलक पेश करता है। यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चुनौती भी है और आम जनता के लिए सतर्क रहने की सीख भी, क्योंकि दुश्मनें देश अक्सर ऐसे ही भेस बदलकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनकर उभरते हैं।
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