“Abu Saifulla Khalid की हत्या: भारत के खिलाफ आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड सिंध में ढेर”

लश्कर-ए-तैयबा के कुख्यात कमांडर Abu Saifulla Khalid की सिंध में गोली मारकर हत्या। जानें कैसे वह भारत में रामपुर, बैंगलोर और नागपुर हमलों का जिम्मेदार था।
सिंध, पाकिस्तान, 18 may: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक बड़ी घटना ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और अन्य आतंकी नेटवर्क्स में हड़कंप मचा दिया है। संगठन का टॉप कमांडर रजाउल्लाह निजामानी उर्फ Abu Saifulla Khalid (अबू सैफुल्लाह खालिद) को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना मटली शहर के फालकारा चौक के पास हुई, जहां हमलावरों ने उसे घर से निकलते ही निशाना बनाया और सिर व सीने में गोलियां दागकर मौके पर ही ढेर कर दिया।
कौन था Abu Saifulla Khalid?
- मालन क्षेत्र का निवासी, लंबे समय तक कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा।
- लश्कर-ए-तैयबा ने उसे “गाजी अबू सैफुल्लाह” की उपाधि दी थी।
- भारत में तीन बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड था, जिनमें रामपुर सीआरपीएफ कैंप (2001), बैंगलोर धमाके (2005) और नागपुर RSS मुख्यालय हमला (2006) शामिल हैं।
- जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने के बाद पाकिस्तान लौटकर लश्कर के लिए भर्ती और फंडिंग का काम करता था।
क्यों हुई उसकी हत्या?
- हाल ही में लश्कर ने उसे अलर्ट किया था और सीमित गतिविधियों का निर्देश दिया था।
- सुरक्षा के बावजूद उसकी हत्या हुई, जिससे आंतरिक गुटबाजी या टारगेट किलिंग की आशंका जताई जा रही है।
- पाकिस्तानी एजेंसियों ने भी उस पर नजर रखी थी, क्योंकि वह ISI के नियंत्रण से बाहर हो गया था।
Abu Saifulla Khalid: भारत में कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड
अबू सैफुल्लाह खालिद, जिसे लश्कर-ए-तैयबा ने “गाज़ी अबू सैफुल्लाह” की उपाधि दी थी, भारत के खिलाफ चलाए जा रहे आतंकी अभियानों में एक प्रमुख चेहरा रहा है। वह मूल रूप से पाकिस्तान के मालन क्षेत्र का निवासी था और लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा। अबू सैफुल्लाह को भारत में तीन बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है—2001 में रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमला, 2005 में बैंगलोर में हुए सिलसिलेवार धमाके और 2006 में नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मुख्यालय पर किया गया हमला। इन हमलों ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को गहरी चुनौती दी थी। कश्मीर में अपना नेटवर्क स्थापित करने के बाद वह पाकिस्तान लौट गया, जहां वह लश्कर-ए-तैयबा के लिए आतंकी भर्ती और फंडिंग जैसे कार्यों में सक्रिय हो गया। उसकी भूमिका न केवल भारत में हमले करवाने तक सीमित थी, बल्कि वह लश्कर के रणनीतिक और साजो-सामानिक ढांचे का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
अबू सैफुल्लाह खालिद की हत्या आतंकी संगठनों में बढ़ते अंदरूनी संघर्ष का संकेत देती है। वह भारत के खिलाफ कई बड़े हमलों का जिम्मेदार था, और उसका अब सफाया हो गया है। यह घटना पाकिस्तान में चल रहे आतंकी गुटों के बीच टकराव को भी उजागर करती है।
WE the Women And ‘OPERATION SINDOOR
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