Mahashivratri 2026 पूजा विधि: भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सही तरीका

क्या आप महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहते हैं? जानिए गरुड़ पुराण और शिव पुराण पर आधारित सही Mahashivratri Puja Vidhi, मंत्र, और 2026 का शुभ मुहूर्त। पूरी जानकारी यहां पढ़ें।
महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। हालांकि प्रत्येक मास में मासिक शिवरात्रि आती है, लेकिन फाल्गुन मास में आने वाली इस शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
अगर आप इस बार Mahashivratri Puja Vidhi को लेकर किसी भी प्रकार के भ्रम में हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहां हम गरुड़ पुराण और शिव पुराण जैसे धर्मग्रंथों के अनुसार पूजा का संपूर्ण तरीका बता रहे हैं।
महाशिवरात्रि पूजा की शुरुआत कैसे करें?
गरुड़ पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि की पूजा एक दिन पूर्व से ही शुरू हो जाती है। भक्तों को चतुर्दशी तिथि से एक दिन पहले त्रयोदशी तिथि में ही भगवान शिव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद चतुर्दशी तिथि के दिन निराहार रहकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
भगवान शिव को प्रिय है यह सामग्री (Samagri)
पूजा में विशेष सामग्री का उपयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, भगवान शिव को बिल्व पत्र और सफेद आंकड़े के फूल अर्पित करने चाहिए, क्योंकि ये उन्हें अतिप्रिय हैं। वहीं, शिव पुराण में रुद्राक्ष, भांग, शिवलिंग और काशी को भगवान शिव का अत्यंत प्रिय बताया गया है।
Mahashivratri 2026 Puja Vidhi: चारों प्रहर की पूजा का महत्व
महाशिवरात्रि के दिन रात्रि के चारों प्रहर में पूजा करने का विशेष विधान है।
- प्रथम प्रहर: भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें। गंगाजल चढ़ाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
- द्वितीय प्रहर: शिवलिंग को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराएं। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
- तृतीय प्रहर: इस प्रहर में बिल्व पत्र और सफेद आंकड़े के फूल अर्पित करें।
- चतुर्थ प्रहर: अंतिम प्रहर में महानिशिथकाल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इससे रोग-शोक से मुक्ति मिलती है।
विशेष मंत्र और उनका प्रभाव
- महामृत्युंजय मंत्र: बीमारी से परेशान और प्राणों की रक्षा के लिए इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए। यह मंत्र देखने में भले ही छोटा है, लेकिन इसका प्रभाव अत्यंत चमत्कारी है।
- मंत्र: ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ
- सुख-सौभाग्य के लिए मंत्र: महिलाएं सुख-सौभाग्य की प्राप्ति के लिए दुग्ध की धारा से अभिषेक करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें:
- मंत्र: ॐ ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ॐ।
- अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए: लक्ष्मी जी केवल भगवान शिव की कृपा से ही जीवन में अखंड रूप से निवास कर सकती हैं। इसके लिए निम्न मंत्र की दस माला का जाप करें:
- मंत्र: ॐ श्रीं ऐं ॐ।
- विवाह बाधा दूर करने के लिए: अगर शादी में कोई बाधा आ रही है, तो इस मंत्र के साथ शिव-शक्ति की पूजा करनी चाहिए:
- मंत्र: हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकांता सुदुर्लभाम।।
- पारिवारिक सुख के लिए: संपूर्ण परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:
- मंत्र: ॐ साम्ब सदा शिवाय नम:।
क्या कहते हैं धर्मग्रंथ?
- गरुड़ पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान करवाना चाहिए। इसके बाद धूप-दीप जलाकर मंत्रों का जाप करने से जीवन की सभी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।
- पूजा के अगले दिन प्रातःकाल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन Mahashivratri Puja Vidhi का पालन करते हुए सिद्ध मुहूर्त में शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा करवाने से व्यवसाय में वृद्धि और नौकरी में तरक्की के योग बनते हैं।
याद रखें, कोई भी व्रत और पूजा पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से ही सफल होती है। महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आए।
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