Chinese Manjha: लखनऊ में पतंग की डोर ने काटी जीवन की डोर !

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Chinese Manjha: लखनऊ में पतंग की डोर ने कटी जीवन की डोर !

 लखनऊ में चाइनीज मांझे से युवक की मौत। हैदरगंज ओवरब्रिज पर घटना, गला कटने से हुई मौत। पढ़ें पूरी खबर। #Chinese Manjha #KiteStringDeath

लखनऊ 4 Feb। उत्साह और मस्ती के प्रतीक माने जाने वाले पतंगबाजी के खेल ने एक बार फिर घातक रूप धारण कर लिया है। बुधवार की शाम लखनऊ के हैदरगंज ओवरब्रिज पर चाइनीज मांझे (Chinese Manjha) ने एक युवक की जान ले ली। इस हादसे ने न केवल एक परिवार को मौत के आगोश में धकेल दिया, बल्कि प्रशासन के लिए एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कब तक यह ‘कातिल डोर’ निर्दोष लोगों की जिन्दगी निगलती रहेगी।

पीड़ित की पहचान दुबग्गा निवासी मोहम्मद शोएब (आयु लगभग 22 वर्ष) के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शोएब बुधवार शाम हैदरगंज ओवरब्रिज के पास अपने दोपहिया वाहन से गुजर रहे थे। तभी अचानक हवा में उड़ रही एक पतंग का चाइनीज मांझा ( Chinese Manjha) उनके गले में लिपट गया। तेज धार वाले इस सिंथेटिक धागे ने उनका गला गहराई से काट दिया, जिससे उनकी हालत तुरंत गंभीर हो गई।

मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें नजदीकी ट्रामा सेंटर पहुंचाया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और रोष का माहौल पैदा कर दिया। शोएब के परिवार पर मानो अचानक से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

 Chinese Manjha कई बार दी जा चुकी है चेतावनी,

गौरतलब है कि लखनऊ में यह पहली बार नहीं है जब चाइनीज मांझे ने जान ली है। पिछले कई वर्षों से यह ‘नायलॉन का खतरा’ शहरवासियों के लिए मौत का सबब बना हुआ है। पुलिस और प्रशासन की ओर से समय-समय पर चाइनीज मांझे के इस्तेमाल और बिक्री पर प्रतिबंध के आदेश जारी किए जाते रहे हैं। अदालतें भी इस मामले में सख्त रुख दिखा चुकी हैं। फिर भी, जमीनी स्तर पर यह घातक धागा आसानी से बाजारों में उपलब्ध हो जाता है।

 Chinese Manjha जिसे प्लास्टिक या सिंथेटिक मांझा भी कहा जाता है, पारंपरिक सूत के मांझे से कहीं अधिक खतरनाक होता है। इसमें कांच के चूरे या धातु के बारीक कण मिले होते हैं और यह नायलॉन जैसी मजबूत सामग्री से बना होता है। यह न केवल तेज धार वाला होता है, बल्कि हवा में बहुत दूर तक जा सकता है और बिना किसी चेतावनी के किसी का गला या अंग काट सकता है। न केवल मनुष्य, बल्कि पक्षियों की मौतों का भी यह एक प्रमुख कारण है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठते सवाल

शोएब की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर है। क्या केवल नोटिस जारी कर देने या कभी-कभार अभियान चला देने से इस जानलेवा खतरे पर अंकुश लग सकता है? सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक इसकी बिक्री के स्रोतों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी और इसे बनाने वालों तक नहीं पहुंचा जाएगा, तब तक ऐसी दुर्घटनाएं थमने वाली नहीं हैं। उनका आरोप है कि बाजार में  Chinese Manjha की बिक्री में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी शामिल है।

क्या है समाधान?

इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जनजागरूकता अभियान चलाना अत्यंत आवश्यक है। माता-पिता और युवाओं को चाइनीज मांझे (Chinese Manjha ) के घातक परिणामों से अवगत कराया जाना चाहिए। पतंगबाजी के शौकीनों को पारंपरिक और सुरक्षित सूत के मांझे का ही इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही, पुलिस को बाजारों में नियमित छापेमारी करके इनकी बिक्री रोकनी होगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चलाना होगा।

मोहम्मद शोएब की असमय मौत एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जो हमें यह याद दिलाती है कि मनोरंजन की कीमत किसी की जान नहीं हो सकती। यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि अब कागजी दिशा-निर्देशों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई का वक्त आ गया है। वरना, हर साल मनाया जाने वाला त्योहार एक शोक में तब्दील होता रहेगा और शोएब जैसे निर्दोष युवाओं की जानें इसकी भेंट चढ़ती रहेंगी।

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