भारत की बड़ी कार्रवाई: चिनाब पर 260 MW Dulhasti Hydel Project को मंजूरी!

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260 MW Dulhasti Hydel Project

 जम्मू-कश्मीर में पहलगाम हमले के बाद भारत की नई रणनीति। सिंधु जल समझौता सस्पेंड करने के बाद अब चिनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती (Dulhasti) जलविद्युत परियोजना (Hydel Project) को मंजूरी। पूरी खबर पढ़ें

नई दिल्ली/जम्मू-कश्मीर 27 DEC । पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा अपनाई गई ‘करारी जवाबी कार्रवाई’ की रणनीति के तहत एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। भारत ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को भेजे जाने वाले स्पष्ट संदेशों की शृंखला में एक और कड़ी जोड़ते हुए जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना (चरण-दो) को पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान कर दी है। यह निर्णय सिंधु जल समझौते को निलंबित किए जाने के ऐतिहासिक फैसले की पृष्ठभूमि में आया है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों को मजबूती देने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

पहलगाम हमले के जवाब में भारत की बड़ी रणनीतिक चाल, चिनाब पर 260 मेगावाट की 260 MW Dulhasti Hydel Project को मिली मंजूरी

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत गठित विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने हाल ही में अपनी 45वीं बैठक में इस प्रस्तावित परियोजना को स्वीकृति दी है। समिति द्वारा दी गई यह मंजूरी लगभग 3,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ परियोजना के लिए निर्माण निविदाएं जारी करने का मार्ग प्रशस्त करती है। ‘रन ऑफ द रिवर’ परियोजना का तात्पर्य ऐसी जलविद्युत परियोजना से है जिसमें नदी के प्रवाह में बड़ी बाधा उत्पन्न किए बिना, उसके प्राकृतिक बहाव का उपयोग कर बिजली उत्पादन किया जाता है।

सिंधु जल समझौते के निलंबन का है संदर्भ

बैठक के विवरण के अनुसार, समिति ने इस तथ्य पर भी ध्यान केंद्रित किया कि चिनाब बेसिन का जल ऐतिहासिक रूप से 1960 की सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अंतर्गत भारत और पाकिस्तान के बीच साझा किया जाता रहा है। हालांकि, समिति ने स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए, “सिंधु जल संधि 23 अप्रैल, 2025 से प्रभावी रूप से निलंबित है।” यह निलंबन पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले, जिसकी जड़ें पाकिस्तान में बताई गईं, के बाद एक रणनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर लिया गया था।

सिंधु बेसिन में तेज हुई विकास गतिविधियां

सिंधु जल संधि के लागू रहते हुए, पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब – का अधिकांश जल पाकिस्तान को प्राप्त होता था, जबकि भारत को पूर्वी नदियों – रावी, ब्यास और सतलुज – के जल पर अधिकार प्राप्त था। संधि के निलंबन के पश्चात, भारत ने पश्चिमी नदियों पर अपने अधिकारों का पूर्ण उपयोग करने की दिशा में तेजी से कार्य प्रारंभ किया है। दुलहस्ती चरण-दो के अलावा, सिंधु बेसिन में सावलकोट, रातले, बरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू और कीर्थई जैसी कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं को गति प्रदान की गई है।

क्या है Dulhasti Hydel Project का स्वरूप?

दुलहस्ती चरण-दो परियोजना, मौजूदा 390 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-एक जलविद्युत परियोजना का ही एक विस्तार है। दुलहस्ती चरण-एक, जिसे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचपीसी) द्वारा वर्ष 2007 में चालू किया गया था, लंबे समय से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। नई परियोजना इस क्षमता में वृद्धि करेगी और क्षेत्र की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

रणनीतिक एवं आर्थिक महत्व

इस परियोजना की मंजूरी का केवल ऊर्जा उत्पादन से ही नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण से भी विश्लेषण किया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत द्वारा पाकिस्तान को यह स्पष्ट संकेत देने का हिस्सा है कि आतंकवाद को प्रश्रय देने की नीति की कीमत अब बहुआयामी होगी। साथ ही, यह परियोजना जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर क्षेत्र के समग्र विकास में भी योगदान देगी।

इस प्रकार, दुलहस्ती (Dulhasti Hydel Project) चरण-दो जलविद्युत परियोजना की मंजूरी केवल एक ऊर्जा परियोजना से कहीं अधिक, भारत की बदलती हुई रणनीतिक सोच और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प का एक प्रतीक बन गई है।

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