Indian Cricket Crisis:भारतीय क्रिकेट हालत “गंभीर ” दक्षिण अफ्रीका ने रचा इतिहास, 408 रनों से जीत !

भारतीय क्रिकेट टीम को दक्षिण अफ्रीका से मिली ऐतिहासिक हार। 66 साल में पहली बार घरेलू टेस्ट में ऐसा संकट, गंभीर पर सवाल। पूरी खबर पढ़ें।
भारतीय क्रिकेट का घरेलू किला, जिसे कभी अभेद्य माना जाता था, अब गहरी दरारों से जूझ रहा है। बुधवार को बंगालुरु में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे और अंतिम टेस्ट मैच में 408 रनों की ऐतिहासिक हार ने न केवल श्रृंखला 2-0 से गंवा दी, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। यह रनों के अंतर से भारत की अब तक की सबसे बड़ी टेस्ट हार है और पहली बार ऐसा हुआ है जब दक्षिण अफ्रीका ने पिछले 25 वर्षों में भारत में कोई टेस्ट सीरीज जीती है।

Indian Cricket Crisis: सात में पांच हार
यह हार केवल एक मैच का आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि एक चिंताजनक प्रवृत्ति का संकेत है। पिछले 66 वर्षों में पहली बार, भारत ने अपने ही घरेलू मैदान पर खेले गए सात टेस्ट मैचों में से पांच हार का सामना किया है। इसमें 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 0-3 की क्लीन स्वीप और अब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 0-2 की शर्मनाक हार शामिल है। यह आंकड़ा उस गौरव और आत्मविश्वास के संहार का प्रतीक है, जिसने दशकों तक टीम इंडिया को दुनिया भर में पहचान दिलाई थी।
मैदान पर दिखा आत्मसमर्पण, बल्लेबाजी पस्त
यह करारी हार केवल हार नहीं, बल्कि एक तरह का आत्मसमर्पण थी। मैदान पर टीम इंडिया की ओर से कोई स्पष्ट योजना, तकनीकी कुशलता या लड़ने की जिजीविषा नजर नहीं आई। विराट कोहली, रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा जैसे अनुभवी स्तंभों के टीम से बाहर होने के बाद, नई लीडरशिप और युवा खिलाड़ी इस विशालकाय दबाव को संभालने में नाकाम रहे। जिस पिच पर भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने वर्षों तक जादू बिखेरा, उसी पर दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों ने सटीक लाइन-लेंथ से भारतीय बल्लेबाजों की कमर तोड़ दी। भारत की बल्लेबाजी परंपरा, जो स्पिन के खिलाफ दुनिया को सबक सिखाती रही है, इस बार अपने ही घर में बिखरती नजर आई।
गौतम गंभीर के कोचिंशिप में टेस्ट रिकॉर्ड चिंताजनक
मुख्य कोच गौतम गंभीर का टेस्ट क्रिकेट में रिकॉर्ड निराशाजनक बना हुआ है। गंभीर के नेतृत्व में भारत ने अब तक 19 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें से महज 7 में जीत दर्ज की जा सकी है, जबकि 10 मैच हार और 2 ड्रॉ रहे। यह जीत का प्रतिशत मात्र 36.82% है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। छह पूरी हुई टेस्ट सीरीज में से केवल दो ही भारत के खाते में हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि टीम योजनाबद्ध तरीके से खेलने और तकनीकी रूप से मजबूत होने में पिछड़ रही है।
हालांकि, गंभीर का व्हाइट-बॉल क्रिकेट में रिकॉर्ड उल्लेखनीय रहा है। टी20 प्रारूप में 90.90% की जीत दर और वनडे में 64.28% की जीत दर दर्शाती है कि समस्या विशेष रूप से टेस्ट क्रिकेट के दृष्टिकोण और तैयारी में निहित है। इस हार के बाद, भारत विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप पॉइंट्स टेबल में पांचवें स्थान पर खिसक गया है, जो अगले चक्र में फाइनल तक पहुंचने की उम्मीदों के लिए एक और झटका है।
पूर्व दिग्गजों ने उठाए सवाल, मांगा बदलाव
टीम के इस शर्मनाक प्रदर्शन पर पूर्व भारतीय क्रिकेटरों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
- पूर्व दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले ने कहा, “भारतीय टीम को सोच-समझ कर निर्णय लेने की जरूरत है। इन नतीजों को भूल नहीं सकते। आपको आपस में बात करनी होगी कि भारतीय टेस्ट क्रिकेट को आगे कैसे ले जाना है।”
- पूर्व भारतीय गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने टीम मैनेजमेंट पर सवाल उठाते हुए कहा, “टेस्ट क्रिकेट में भारत के रवैये से निराश हूं। हरफनमौलाओं पर इतना जोर देना समझ से परे है, खासकर जब आप उनसे गेंदबाजी नहीं करा रहे।”
- पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने बल्लेबाजी की कमी को रेखांकित करते हुए कहा, “भारतीय बल्लेबाज न स्पिन खेल पाए, न धैर्य दिखा पाए। साउथ अफ्रीका ने हर विभाग में हमें मात दी।”
समय है आत्ममंथन और पुनर्निर्माण का
भारतीय क्रिकेट अभूतपूर्व मोड़ पर खड़ा है। सवाल सिर्फ एक-दो मैच हारने का नहीं, बल्कि उस मानसिकता और रणनीति का है जिसने भारत को घरेलू मैदान पर अजेय बनाया था। अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच सही संतुलन बनाना, टेस्ट क्रिकेट के लिए विशेषज्ञ खिलाड़ियों को प्राथमिकता देना और मानसिक रूप से मजबूत इकाई तैयार करना अब कोचिंग स्टाफ और चयनकर्ताओं की सबसे बड़ी चुनौती है। यदि इस संकट को गंभीरता से नहीं लिया गया और जड़सूत्री बदलाव नहीं किए गए, तो भारतीय क्रिकेट का यह घरेलू किला और भी धराशायी हो सकता है। प्रशंसकों को उम्मीद है कि यह झटका टीम और प्रबंधन के लिए एक जागृति का क्षण साबित होगा।
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