Dhanteras 2025 पूजा विधि: घर में लाएं धन-समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य!

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Dhanteras 2025 पूजा विधि

Dhanteras 2025 : धनतेरस की शुभ पूजा विधि। भगवान कुबेर व धनवंतरी का पूजन कर घर लाएं धन की 13 गुना वृद्धि व अच्छा स्वास्थ्य। सरल तरीका यहाँ देखे!


Dhanteras:भगवान कुबेर और धनवंतरी की विधिवत पूजा से घर में लाएं धन-समृद्धि और स्वास्थ्य का वरदान

दीपावली के त्योहार की शुरुआत धनतेरस के शुभ दिन से होती है। यह दिन धन और स्वास्थ्य के देवताओं – भगवान कुबेर और भगवान धनवंतरी – की आराधना का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में धन-धान्य की 13 गुना वृद्धि होती है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। यहाँ जानिए सरल और पूर्ण धनतेरस पूजा विधि

पूजन की तैयारी और आसन

धनतेरस की पूजा संध्या के समय की जाती है। सबसे पहले उत्तर दिशा की ओर मुख करके एक चौकी रखें। उस पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। इस चौकी पर चावल का आसन देकर भगवान कुबेर की फोटो या मूर्ति स्थापित करें। यदि यह उपलब्ध न हो, तो सुपारी को ही कुबेर जी का स्वरूप मानकर रख दें। साथ ही, घर के मौजूदा लक्ष्मी-गणेशजी की प्रतिमा भी विराजमान करें। नए खरीदे गए लक्ष्मी-गणेशजी का पूजन दीपावली के दिन किया जाता है। इसके बाद, आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धनवंतरी के रूप में एक सुपारी स्थापित करें।

संकल्प और दीप प्रज्ज्वलन

हाथ जोड़कर संकल्प लें – “हे भगवन! मैं आपका पूजन कर रहा/रही हूँ। कृपया मेरी पूजा स्वीकार करें, मेरे घर में अन्न-धन की वृद्धि करें और सभी का स्वास्थ्य अच्छा बनाए रखें।” इसके पश्चात पीतल का एक दीपक देसी घी से जलाएं। इसे कुबेर दीपक की भावना से प्रज्ज्वलित करें। इस दिन खरीदे गए सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन या पैसों को भी पूजा की चौकी पर रखें। अपने लॉकर और तिजोरी का भी पूजन किया जा सकता है।

विधिवत पूजन और विशेष सामग्री

सर्वप्रथम जल के छींटे देकर सभी देवताओं का स्नान कराएं। उसके बाद रोली, हल्दी और अक्षत से तिलक करें। वस्त्र के रूप में कलावा अर्पित करें। फूल चढ़ाने के बाद एक विशेष चीज धनिया अवश्य चढ़ाएं। धनिया को धन का प्रतीक माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इसे चढ़ाने से घर में धन की 13 गुना वृद्धि होती है।

इसके पश्चात, भगवान धनवंतरी को औषधीय वस्तुएं जैसे हल्दी, तेजपत्ता, दालचीनी, लौंग, इलायची, तुलसी, एलोवेरा आदि समर्पित करें और परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करें।

भोग और आरती

भोग के रूप में खील-पतासे का भोग विशेष रूप से लगाएं। नए खरीदे गए बर्तनों को खाली न रखें, उनमें खील-पतासे भर दें। इसके अलावा, मिठाई और मौसमी फलों का भोग भी लगाएं। धूप जलाकर उनकी आरती करें। यदि कुबेर दीपक जलाया है तो उसे हिलाएं नहीं, बल्कि आरती के लिए अलग से कपूर या दीपक जलाएं। पहले गणेश जी, फिर कुबेर जी और अंत में लक्ष्मी जी की आरती करें। आरती के बाद पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें।

यम दीपक और झाड़ू का पूजन

पूजन के बाद, रात्रि में यम का दीपक जलाकर बाहर रखने की परंपरा है। कई स्थानों पर 13 दीपक भी जलाए जाते हैं। साथ ही, धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदकर लाना और उसका पूजन करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल पर ही झाड़ू को तिलक लगाएं, अक्षत चढ़ाएं और धूप-दीप दिखाएं।

शास्त्रों के अनुसार, धनतेरस के दिन इस सरल पूजा विधि का पालन करने से भगवान कुबेर की कृपा से घर में धन-संपदा की अभूतपूर्व वृद्धि होती है और भगवान धनवंतरी की कृपा से परिवार का स्वास्थ्य सदैव अच्छा बना रहता है। यह पूजा हमें भौतिक समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य के महत्व का स्मरण भी कराती है।

आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं!

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