Ayodhya: 2 मुस्लिम युवकों ने की “घर वापसी”,कहा- “मिली मानसिक शांति”!

Share the News
Ayodhya: 2 मुस्लिम युवकों ने की "घर वापसी",कहा- "मिली मानसिक शांति"!


Ayodhya में दो मुस्लिम युवकों ने स्वेच्छा से सनातन धर्म (DharmaParivartan) अपनाया। जानें धर्म परिवर्तन की वजह और उनके बयान। #Ayodhya #DharmaParivartan

अयोध्या 4 Oct । उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में धार्मिक सद्भाव की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने सभी का ध्यान खींचा है। यहाँ के सोहावल क्षेत्र के दो मुस्लिम युवकों ने स्वेच्छा से अपना पुराना धर्म त्यागकर सनातन धर्म को अपना लिया है। इस दौरान उन्होंने अपने नाम भी बदल लिए हैं, जो उनके नए जीवन और पहचान का प्रतीक है।

इस धर्म परिवर्तन की घटना ने शहर में चर्चा का विषय बन गई है। दोनों युवकों ने अपने इस निर्णय के पीछे आध्यात्मिक खोज और मानसिक शांति की तलाश को मुख्य कारण बताया है। उनका दावा है कि यह फैसला किसी दबाव या लालच में नहीं, बल्कि पूरी तरह से उनकी स्वेच्छा और आस्था से लिया गया है। दरअसल उनके अनुसार हिन्दू धर्म में अपने भीतर जा कर ईश्वर से जुड़ा जा सकता है!

क्या है पूरा मामला?

मोहम्मद अख्तर सिद्दीकी के पुत्र अरशद सिद्दीकी ने अब अपना नाम बदलकर राकेश मौर्य रख लिया है। वहीं, दूसरे युवक मोनू, जो उस्मान के पुत्र हैं, अब मनीष कुमार के नाम से जाने जाएंगे। दोनों ने स्पष्ट किया कि अब वे अपने पूर्व परिवार से कोई नाता नहीं रखेंगे और पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ हिंदू धर्म की परंपराओं का पालन करेंगे।

संत प्रेमानंद के प्रवचनों से मिली प्रेरणा

दोनों युवकों ने बताया कि उनके इस जीवन परिवर्तन में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी के प्रवचनों की अहम भूमिका रही। उनके आध्यात्मिक विचारों और उपदेशों से प्रभावित होकर ही उन्होंने सनातन धर्म को अपनाने का मन बनाया। इसी आध्यात्मिक यात्रा के परिणामस्वरूप आज वे एक नए विश्वास और नए जीवन में प्रवेश कर रहे हैं।

Ayodhya के डीएम को सौंपा आवेदन:

इस औपचारिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए, दोनों युवकों ने संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर अयोध्या के जिला दंडाधिकारी (DM) के नाम एक आवेदन पत्र भी सौंपा है। इस आवेदन को भरत हनुमान मिलन मंदिर के महंत परमात्मा दास और बजरंग दल मंत्री लालजी शर्मा ने प्रस्तुत करने में उनकी सहायता की। इस आवेदन का उद्देश्य उनके सरकारी दस्तावेजों, जैसे आधार कार्ड आदि, में नए नाम का सही प्रतिबिंबन सुनिश्चित करना है।

“परिवार से आठ साल से नहीं है कोई संबंध”: राकेश मौर्य

नया नाम धारण कर चुके राकेश मौर्य (पूर्व नाम अरशद) ने मीडिया से बातचीत में अपने फैसले के पीछे के कारणों को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमने यह धर्म परिवर्तन किसी दबाव या लोभ में आकर नहीं किया है। सन 2014 से ही हमारे सारे मित्र नॉन-मुस्लिम हैं। हमारा उठना-बैठना और सारी गतिविधियाँ उन्हीं के साथ हैं। हम विभिन्न स्थानों पर दर्शनों के लिए भी जाते रहे हैं। इसी exposure के चलते हम हिंदू धर्म की ओर प्रेरित हुए और यह कदम उठाया।”

उन्होंने आगे कहा, “हम एक आईटी प्रोफेशनल हैं और विप्रो कंपनी में कार्यरत हैं। पिछले 10 वर्षों से इसी क्षेत्र में हूँ। हमारे परिवार को इस फैसले से कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि उनसे हमारा पिछले 8 सालों से कोई संबंध ही नहीं रहा। ना वो हमारे जीवन में शामिल होते हैं और ना हम उनके।”

“अपनी मर्जी से लिया फैसला”: मनीष कुमार

दूसरे युवक, अब मनीष कुमार (पूर्व नाम मोनू) ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, “हमें हिंदू धर्म अच्छा लगता है। अपनी मर्जी से हमने धर्म परिवर्तन किया है, किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं है। महाराज जी (प्रेमानंद जी) की कृपा से हमें बहुत अच्छा लग रहा है। हमें अपनी पुरानी बिरादरी में अच्छा नहीं लगता था, इसलिए हमने फैसला किया कि हमें उनके साथ नहीं रहना है। आगे से हम अपने हिसाब से जिएंगे।”

मंदिर समिति ने ली जिम्मेदारी

इस पूरे प्रकरण में, भरत हनुमान मिलन मंदिर समिति ने इन दोनों युवकों की ‘घर वापसी’ की पूरी जिम्मेदारी ली है। समिति ने सुनिश्चित किया है कि दोनों युवकों को उनके नए धार्मिक और सामाजिक जीवन में सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले। यह घटना अयोध्या जैसे धार्मिक महत्व के शहर में व्यक्तिगत आस्था और चयन की स्वतंत्रता पर एक महत्वपूर्ण बहस को भी रेखांकित करती है।

Sharad Purnima 2025: 6 अक्टूबर को,जानें कथा,पीछे का विज्ञानं एवं पूजन विधि!


Discover more from Utthan Xpress

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Discover more from Utthan Xpress

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading