Divine Blessings: शिवभक्तों के लिए Powerful Pradosha Vrat 2025: जानें शुभ मुहूर्त, कथा और अनोखे लाभ

Pradosha Vrat 2025: अश्विन मास का शुक्र प्रदोष व्रत, विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख, समृद्धि और शिव कृपा प्राप्त होती है ।
लखनऊ 15 सितम्बर, 2025: सनातन धर्म में Pradosha Vrat का अत्यधिक महत्व है। यह व्रत हर महीने के दोनों पक्षों – शुक्ल और कृष्ण – की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। प्रदोष का समय सूर्यास्त के बाद का माना गया है और इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से साधक को अद्भुत फल की प्राप्ति होती है।
अश्विन माह में पड़ने वाला यह व्रत खास माना जा रहा है क्योंकि यह शुक्रवार को पड़ रहा है और इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
कब है Pradosha Vrat 2025?
- अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 सितंबर 2025, रात 11:24 बजे से शुरू होगी।
- इसका समापन 19 सितंबर 2025, रात 11:36 बजे पर होगा।
- उदया तिथि के अनुसार व्रत और पूजा 19 सितंबर 2025 (शुक्रवार) को की जाएगी।
इस दिन Pradosha Vrat रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Pradosha Vrat का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, पूजा का सबसे उत्तम समय प्रदोष काल में ही होता है।
- शुभ मुहूर्त: शाम 06:21 मिनट से रात 08:43 मिनट तक
- कुल अवधि: 2 घंटे 21 मिनट
इस समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Shukra Pradosha Vrat का महत्व

जब प्रदोष व्रत शुक्रवार को आता है तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं। इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- इस व्रत से जीवन में खुशहाली आती है।
- जातक को संकटों से मुक्ति मिलती है।
- परिवार में सौभाग्य और समृद्धि बढ़ती है।
- विशेष रूप से विवाहित महिलाएं यह व्रत पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख के लिए करती हैं।
Pradosha Vrat की पूजा विधि (Puja Vidhi)
- प्रातः स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- पूजा स्थल को शुद्ध करें और व्रत का संकल्प लें।
- शाम के समय प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं।
- शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल) से अभिषेक करें।
- माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
- शुक्र प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में शिव-आरती और भोग लगाकर व्रत पूर्ण करें।
Pradosha Vrat पर शुभ योग
इस बार के व्रत में कई विशेष योग बन रहे हैं:
- सिद्ध और साध्य संयोग – जो इच्छाओं की पूर्ति करने वाला है।
- अभिजीत मुहूर्त का संयोग – जिसे सभी कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
इन विशेष योगों में प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (Pradosha Vrat Katha)

प्राचीनकाल में एक निर्धन पुजारी की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर जीवनयापन करने लगी। एक दिन उसकी मुलाकात विदर्भ देश के राजकुमार धर्मगुप्त से हुई, जो अपने पिता को खोकर राज्य से निष्कासित होकर भटक रहा था।
पुजारी की पत्नी ने राजकुमार को अपने पुत्र समान स्वीकार कर लिया। बाद में वह दोनों बालकों को लेकर शांडिल्य ऋषि के आश्रम गई। वहाँ से उसने प्रदोष व्रत की कथा और विधि जानी और व्रत करना शुरू कर दिया।
कथा का मोड़
कुछ समय बाद राजकुमार वन में गंधर्व कन्या अंशुमती से मिला। दोनों में वार्तालाप और परिचय हुआ। गंधर्व कन्या के माता-पिता ने धर्मगुप्त को पहचान लिया और उसका विवाह अंशुमती से कर दिया।
भगवान शिव की कृपा से राजकुमार ने विशाल गंधर्व सेना की मदद से विदर्भ पर विजय पाई और राज्य पुनः प्राप्त कर लिया। उसने पुजारी की पत्नी और पुत्र को भी महल में आदरपूर्वक स्थान दिया।
व्रत का फल

राजकुमार ने अपनी पत्नी को बताया कि उसकी सारी सफलता और सुख प्रदोष व्रत के प्रभाव से संभव हुआ है। तभी से इस व्रत की महिमा चारों ओर फैल गई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से:
- सभी कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं।
- साधक को सुख, सौभाग्य और समृद्धि मिलती है।
- जीवन में शिव-कृपा का आशीर्वाद बना रहता है।
क्यों करें Pradosha Vrat?
- भगवान शिव की कृपा पाने के लिए।
- पारिवारिक सुख और सौभाग्य बढ़ाने के लिए।
- शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए।
- जीवन की कठिनाइयों से छुटकारा पाने के लिए।
- वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने के लिए।
Pradosha Vrat केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भक्त और भगवान शिव के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है। अश्विन मास का शुक्र प्रदोष व्रत (19 सितंबर 2025) खास योगों से युक्त है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है।
भक्तों को चाहिए कि वे अफवाहों से दूर रहकर केवल धार्मिक ग्रंथों और पंचांग पर विश्वास करें और पूरे श्रद्धा भाव से प्रदोष व्रत करें।
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