Radha Ashtami 2025: कब है तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और राधा रानी के जन्म का रहस्य

Radha Ashtami 2025 पर जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और राधा रानी का जन्मस्थान। पढ़ें पूरी जानकारी और प्राप्त करें राधा रानी का आशीर्वाद।
लखनऊ 29 अगस्त 2025: हिंदू धर्म में भाद्रपद मास का विशेष महत्व है। जहां कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) मनाया जाता है, वहीं शुक्ल पक्ष की अष्टमी को उनकी परम प्रिय सखी और अनन्य भक्ति की प्रतिमूर्ति राधा रानी का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। यही पर्व Radha Ashtami कहलाता है।
मान्यता है कि राधा जी की पूजा से भक्त को न केवल श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है बल्कि जीवन के समस्त दुख और बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।
इस वर्ष Radha Ashtami 2025 का पर्व 31 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की पूजा विधि, व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त, धार्मिक योग और राधा रानी के पावन नामों के बारे में विस्तार से।
Radha Ashtami 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2025, रात 10:46 बजे
- तिथि समाप्ति: 01 सितंबर 2025, दोपहर 12:57 बजे
- Radha Ashtami पर्व: उदया तिथि के अनुसार 31 अगस्त 2025 (रविवार) को मनाया जाएगा।
- पूजा का उत्तम मुहूर्त: प्रातः 11:05 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक (लगभग 2 घंटे 30 मिनट)
इस अवधि में राधा रानी की पूजा करने से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है।
Radha Ashtami व्रत और पूजा विधि
राधा अष्टमी (Radha Ashtami) व्रत को विधि-विधान से करने का विशेष महत्व है।
व्रत की विधि:
- प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और ध्यान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण कर सबसे पहले राधा जी का ध्यान करें।
- व्रत का संकल्प लें और उपवास का आरंभ करें।
- पूजा स्थल पर पीले वस्त्र से ढकी चौकी पर राधा जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- तांबे/मिट्टी के कलश की स्थापना करें और षोडशोपचार विधि से पूजा करें।
- राधा-कृष्ण दोनों की पूजा करें और भोग, पुष्प, धूप, दीप अर्पित करें।
- राधा चालीसा, राधा स्तोत्र या 108 नामों का जाप करें।
- दिन में किसी सुहागिन महिला को वस्त्र, अन्न या भोजन दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
Radha Ashtami व्रत का महत्व

- मान्यता है कि Radhashtami के दिन व्रत और पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय रहता है।
- कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
- यह व्रत जीवन की समस्त कठिनाइयों को दूर करता है।
- भक्त को राधा-कृष्ण दोनों का आशीर्वाद मिलता है।
- परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
Radha Ashtami 2025 पर विशेष शुभ योग
इस वर्ष Radhashtami पर कई पावन योग बन रहे हैं:
- बुधादित्य योग: सिंह राशि में बुध और सूर्य की युति से बन रहा है।
- त्रिग्रही योग: सूर्य, बुध और केतु की उपस्थिति से शुभ फलदायी योग।
👉 इन योगों में की गई पूजा का प्रभाव कई गुना अधिक होता है और भक्त की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
Radhashtami के दिन किए जाने वाले खास उपाय
1) विवाह में बाधा दूर करने के लिए
राधा अष्टमी पर सच्चे मन से इस मंत्र का जप करें:
“ॐ ह्रीं श्री राधिकायै नमः”
👉 मान्यता है कि इससे विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
2) दांपत्य जीवन सुखमय बनाने के लिए
राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा कर उन्हें मोर पंख, बांसुरी और पुष्प अर्पित करें।
3) रिश्तों को मजबूत करने के लिए
राधा रानी के 108 नामों का जाप करें। इससे प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।
राधा रानी के 28 विशेष नाम

राधा रानी को पूजने वाले वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, राधा जी के 28 नाम हैं, और इन नामों का जाप करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी हो जाती है. इन नामों को कई भक्ति ग्रंथों और गुरुओं द्वारा बताया गया है, और यह माना जाता है कि इन नामों के जप से भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं. Radha Ashtami के दिन ज़रूर करें राधा रानी के इन 28 नामो का जाप:
1. राधा
2. रासेश्वरी
3. रम्या
4. कृष्ण मत्राधिदेवता
5. सर्वाद्या
6. सर्ववन्द्या
7. वृन्दावन विहारिणी
8. वृन्दा राधा
9. रमा
10. अशेष गोपी मण्डल पूजिता
11. सत्या
12. सत्यपरा
13. सत्यभामा
14. श्री कृष्ण वल्लभा
15 वृष भानु सुता
16. गोपी
17. मूल प्रकृति
18. ईश्वरी
19. गान्धर्वा
20. राधिका
21. रम्या
22. रुक्मिणी
23. परमेश्वरी
24. परात्परतरा
25. पूर्णा
26. पूर्णचन्द्रविमानना
27. भुक्ति- मुक्तिप्रदा
28. भवव्याधि-विनाशिनी
Radha Ashtami- शास्त्रीय मान्यता
कर जोरी वंदन करूं में
नित नित करूं प्रणाम
रसना से गाता रहूं श्री राधा राधा नाम ||
जय हो जय श्री राधे
ब्रह्मवैवर्त पुराण में स्वयं श्री हरि विष्णु जी ने कहा है कि “जो व्यक्ति अनजाने में भी राधा नाम का उच्चारण करता है, उसके आगे मैं सुदर्शन चक्र लेकर चलता हूँ और उसके पीछे शिवजी त्रिशूल लेकर। उसके दाईं ओर इंद्र और बाईं ओर वरुण देव उसकी रक्षा करते हैं।”
इससे स्पष्ट होता है कि Radhashtami का महत्व कितना गहन है।
बरसाना की नहीं थीं राधा, यहां हुआ था जन्म

राधा जी के जन्म को लेकर अनेक किंवदंतियां प्रचलित हैं। आम तौर पर लोग मानते हैं कि वे बरसाना की थीं, लेकिन सच यह है कि उनका जन्म बरसाना से लगभग 50 किलोमीटर दूर रावल गांव में हुआ था। रावल में ही उनका जन्मस्थान मंदिर स्थित है। मान्यता है कि राधा का प्रकट होना किसी साधारण घटना का परिणाम नहीं था।
कथा के अनुसार, राधा की माता कृति यमुना नदी में स्नान करते हुए पुत्री की कामना करती थीं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन यमुना से कमल का फूल प्रकट हुआ। उस कमल की दिव्य आभा से सोने-सी चमक निकल रही थी, और उसी पर एक नेत्र बंद छोटी कन्या विराजमान थीं। यही दिव्य बालिका राधारानी थीं। इस स्थान को आज मंदिर के गर्भगृह के रूप में पूजा जाता है।
रोचक बात यह भी है कि राधा जी के जन्म के 11 महीने बाद ही मथुरा में कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। जब नंदबाबा ने कृष्ण जन्म की खुशी में संदेश भेजा और उत्सव मनाया, तब वृषभान राधारानी को लेकर वहां पहुंचे। कहा जाता है कि जैसे ही राधा जी बालकृष्ण के पास पहुंचीं, उनके नेत्र खुल गए और उन्होंने सबसे पहला दर्शन श्रीकृष्ण का किया। यही क्षण राधा-कृष्ण के अनंत प्रेम की आरंभिक कड़ी माना जाता है।
राधा और कृष्ण क्यों गए बरसाना?

भगवान कृष्ण के जन्म के बाद से ही गोकुल की धरती पर संकट बढ़ने लगे थे। कंस का अत्याचार इतना भयंकर था कि वहां का जनजीवन असहनीय हो गया था। गोकुल के लोग लगातार भय और परेशानी में जी रहे थे।
इसी संकट के बीच नंद बाबा ने निर्णय लिया कि अब इस समस्या का हल ढूंढना ही होगा। उन्होंने बृज क्षेत्र के स्थानीय राजाओं और गणमान्य लोगों की एक बड़ी बैठक बुलाई। उस समय बृज के सबसे बड़े राजा वृषभान माने जाते थे, क्योंकि उनके पास लगभग 11 लाख गायें थीं। तुलना में नंद बाबा के पास 9 लाख गायें थीं। परंपरा के अनुसार, जिसके पास सबसे अधिक गायें होती थीं, उसे वृषभान कहा जाता था, जबकि जिनके पास उससे कम गायें होतीं, उन्हें नंद कहा जाता था।
बैठक में यह तय हुआ कि कंस के अत्याचारों से बचने के लिए अब गोकुल और रावल को छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर चला जाना ही उचित होगा। इसी फैसले के बाद गोकुल से नंद बाबा और उनके अनुयायी पलायन करके एक पहाड़ी पर जा बसे। यही जगह आगे चलकर नंदगांव के नाम से प्रसिद्ध हुई।
इसी तरह, राजा वृषभान भी अपनी पत्नी कृति और पुत्री राधारानी को लेकर दूसरी पहाड़ी पर आकर बस गए। समय के साथ इस स्थान को बरसाना कहा जाने लगा। यही वह पवित्र धाम है, जहां राधा और कृष्ण का बाल्यकाल बीता और जिसने उनकी दिव्य लीलाओं को सहेजा।
Radha Ashtami 2025 भक्तों के लिए अद्वितीय अवसर है। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा, व्रत और मंत्र-जप करने से जीवन की हर कठिनाई दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।
इस वर्ष विशेष शुभ योगों में पड़ रही राधा अष्टमी(Radha Ashtami) का महत्व और भी बढ़ जाता है। अतः हर भक्त को Radha Ashtami के दिन पूर्ण श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत करना चाहिए।
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