महालक्ष्मी व्रत 2025: तिथि, महत्व, पूजन विधि, श्री सूक्त पाठ और व्रत में भूल से भी न करें ये गलतियां

महालक्ष्मी व्रत 2025 की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें—16 दिनों तक चलने वाले इस व्रत की तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा और महत्व विस्तार से जानें। मां लक्ष्मी की कृपा से मिलेगा सुख-समृद्धि और दरिद्रता का नाश।
लखनऊ 28 अगस्त 2025: हिंदू धर्म में व्रत-उपवास का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह न केवल आध्यात्मिक साधना का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि भक्ति और श्रद्धा के माध्यम से मनुष्य को दिव्य आशीर्वाद भी दिलाता है। इन्हीं व्रतों में से एक है महालक्ष्मी व्रत, जो माता लक्ष्मी की कृपा पाने और घर-परिवार में सुख-समृद्धि स्थापित करने का श्रेष्ठ साधन माना जाता है। यह व्रत हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से प्रारंभ होकर अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक पूरे 16 दिनों तक चलता है। मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन और नियमपूर्वक करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में दरिद्रता का नाश होता है।
महालक्ष्मी व्रत 2025 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार महालक्ष्मी व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से प्रारंभ होकर अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक चलता है। यह व्रत कुल 16 दिनों तक रखा जाता है और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है।
- व्रत की शुरुआत: 30 अगस्त 2025, रात 10:46 बजे
- पहले दिन चंद्र उदय: दोपहर 1:11 बजे
- व्रत का समापन: 14 सितंबर 2025
इस दौरान महिलाएं और पुरुष, विशेषकर गृहस्थ, माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं और घर-परिवार के लिए सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं।
महालक्ष्मी व्रत का महत्व

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महालक्ष्मी व्रत का पालन करने से घर में सुख-शांति, धन-धान्य की प्राप्ति और समृद्धि बनी रहती है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने वाली महिलाएं अपने परिवार की रक्षा करती हैं और जीवन की सभी कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
- घर में कभी धन की कमी नहीं होती।
- पारिवारिक कलह दूर होती है।
- जीवन में सौभाग्य और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।
- यह व्रत करने वालों के घर हमेशा मां लक्ष्मी का वास रहता है।
धर्मशास्त्रों में यह भी लिखा है कि महालक्ष्मी व्रत के दौरान अनाज का सेवन वर्जित है। फलाहार और सात्विक भोजन करना ही शुभ माना जाता है।
महालक्ष्मी व्रत की पूजन विधि
महालक्ष्मी व्रत की पूजा विधि बहुत ही पवित्र और अनुशासित तरीके से की जाती है।
- प्रातःकाल स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर मां लक्ष्मी की मूर्ति या फोटो स्थापित करें।
- माता को पंचामृत स्नान कराएं।
- एक कलश में जल भरें और ऊपर नारियल रखकर इसे माता के सामने रखें।
- माता को श्रृंगार का सामान, पुष्प और फल अर्पित करें।
- दीपक जलाकर धूप अर्पित करें और भोग लगाएं।
- श्री सूक्त और महालक्ष्मी मंत्रों का पाठ करें।
- चंद्रोदय के समय माता को अर्घ्य दें।
श्री सूक्त पाठ का महत्व

श्री सूक्त को महालक्ष्मी व्रत के दौरान पढ़ना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह पाठ मां लक्ष्मी को प्रसन्न करता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है।
चलिए पढ़ते हैं श्री सूक्त पाठ। श्री सूक्त पाठ (Shri Sukt Path)
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्णरजतस्त्रजाम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।
तां म आ वह जातवेदो, लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम् ।
अश्वपूर्वां रथमध्यां, हस्तिनादप्रमोदिनीम् ।
श्रियं देवीमुप ह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।
कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।
पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।
तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।
आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः ।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।।
उपैतु मां दैवसखः, कीर्तिश्च मणिना सह ।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।
अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात् ।।
गन्धद्वारां दुराधर्षां, नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।
ईश्वरीं सर्वभूतानां, तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।
मनसः काममाकूतिं, वाचः सत्यमशीमहि ।
पशूनां रूपमन्नस्य, मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।
कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम ।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पद्ममालिनीम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।
आर्द्रां य करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।
तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।
य: शुचि: प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् ।
सूक्तं पंचदशर्चं च श्रीकाम: सततं जपेत् ।।
।। इति समाप्ति ।।
महालक्ष्मी व्रत में बोले जाने वाले मंत्र

1. लक्ष्मी मूल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नमः।।
2. कुबेर अष्टलक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
3. लक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॥
4. अष्टलक्ष्मी सिद्धि मंत्र
ऐं ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्मीयै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नम: स्वाहा॥
महालक्ष्मी व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां
महालक्ष्मी व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब इसके नियमों का पालन सही ढंग से किया जाए।
1. नमक का सेवन न करें
इस व्रत में नमक का पूर्णतः त्याग किया जाता है। सेंधा नमक भी वर्जित है।
2. तामसिक भोजन से परहेज करें
लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशे का सेवन व्रत के नियमों को तोड़ देता है।
3. झूठ बोलना और अपशब्द कहना
इस दौरान मन और वाणी की पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है।
4. दिन में सोना वर्जित
दिन में सोने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है। पूरा समय पूजा-पाठ और ध्यान में लगाना चाहिए।
5. गंदे कपड़े न पहनें
व्रत के दौरान साफ और पवित्र वस्त्र पहनें। खासकर लाल या गुलाबी वस्त्र शुभ माने जाते हैं।

FAQs: महालक्ष्मी व्रत से जुड़ी सामान्य जिज्ञासाएं
Q1. महालक्ष्मी व्रत कितने दिन का होता है?
-यह व्रत कुल 16 दिनों तक चलता है।
Q2. महालक्ष्मी व्रत में क्या खाना चाहिए?
-फल, दूध और सात्विक आहार ही लेना चाहिए।
Q3. क्या महालक्ष्मी व्रत केवल महिलाएं कर सकती हैं?
-नहीं, पुरुष भी यह व्रत कर सकते हैं।
Q4. महालक्ष्मी व्रत करने से क्या लाभ होता है?
-घर में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
महालक्ष्मी व्रत 2025 एक अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत है। इसका पालन करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस व्रत के दौरान श्री सूक्त का पाठ, मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा और नियमों का पालन अनिवार्य है। अगर आप सही विधि से यह व्रत करेंगे, तो निश्चित ही मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में धन-वैभव और सौभाग्य की वृद्धि होगी।
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