भारत-अमेरिका के बीच 2+2 वार्ता : अहम मुद्दों पर हुई बातचीत, टैरिफ पर स्पष्टता नहीं

India US के बीच 2+2 वार्ता हुई। रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा हुई, लेकिन 50% टैरिफ पर कोई स्पष्टता नहीं मिली। पूरी खबर पढ़ें।
नई दिल्ली 27 Aug: भारत और अमेरिका के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता ने द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर एक बार फिर सबका ध्यान केंद्रित किया है। भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लागू होने की अवधि से मात्र एक दिन पहले, दोनों देशों के विदेश एवं रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक उच्च-स्तरीय वार्ता संपन्न हुई। इस वर्चुअल बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस वार्ता में दोनों पक्षों ने कारोबार से जुड़े मुद्दों, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, दुर्लभ धातुओं के खनन और आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अतिरिक्त शुल्क के विवादास्पद मुद्दे पर कोई सीधी बातचीत हुई या नहीं।
India US 2+2 Talks
यह बैठक India US 2+2 Talks के मध्यस्थता स्तर का हिस्सा थी, जिसमें मंत्रिस्तरीय बैठकों में लिए गए फैसलों की समीक्षा और उन पर अमल की रूपरेखा तय की जाती है। भारतीय दल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) श्री नागराज नायडू और रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री विश्वेष नेगी ने किया। वहीं, अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व दक्षिण व मध्य एशिया ब्यूरो की वरिष्ठ अधिकारी श्रीमती बेथानी पी. मारीसन और रक्षा मंत्रालय के हिंद-प्रशांत सुरक्षा मामलों के प्रभारी सह-सचिव श्री जेडीडाह पी. रोयाल ने किया।
इस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम रक्षा सहयोग के क्षेत्र में सामने आया। दोनों देश भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के लिए अगले दस वर्षों के एक नए फ्रेमवर्क पर सहमत हुए हैं, जिस पर शीघ्र ही हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। इस नए समझौते में रक्षा प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण, संचालन संबंधी समन्वय, क्षेत्रीय सहयोग और सूचना साझाकरण जैसे बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है।
इसके अलावा, दोनों पक्षों ने क्वाड (Quad) जैसे बहुपक्षीय समूह के तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, मजबूत और संपन्न बनाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक के अंत में दोनों देशों ने एक-दूसरे के प्रति आभार व्यक्त करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा बनाने पर सहमति जताई, ताकि दोनों राष्ट्रों की जनता को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह वार्ता टैरिफ जैसे कठिन मुद्दों के बावजूद दोनों लोकतंत्रों के बीच चल रहे सामरिक संवाद की निरंतरता को दर्शाती है। भविष्य में होने वाली उच्च-स्तरीय बैठकों में इन व्यापारिक मतभेदों पर सीधे तौर पर चर्चा होने की संभावना बनी हुई है।
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