भारत में पहली बार!Indian Oil इस्तेमाल किए गए तेल से 35,000 टन टिकाऊ विमानन ईंधन बनाएगी “

Indian Oil ने खराब खाद्य तेल से टिकाऊ विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel) बनाने का प्रमाणन हासिल किया। जानें कैसे यह पर्यावरण को बचाएगा।
नई दिल्ली: 17 Aug :घरों और रेस्टॉरेंट्स में खाना तलने के बाद बचे खराब तेल को अक्सर फेंक दिया जाता है, लेकिन अब इसी तेल से टिकाऊ विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel – SAF) बनाया जाएगा। भारत की प्रमुख पब्लिक सेक्टर तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने इस दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। कंपनी के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने बताया कि हरियाणा के पानीपत रिफाइनरी को इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल से SAF बनाने का अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन (ICAO’s CORSIA Certification) मिल गया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाली IOC भारत की पहली कंपनी बन गई है।
क्या है टिकाऊ विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel)?
SAF एक गैर-पेट्रोलियम आधारित ईंधन है, जो विमानों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। इसे पारंपरिक जेट ईंधन के साथ 50% तक मिलाया जा सकता है। भारत सरकार ने 2027 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट ईंधन में 1% SAF मिश्रण को अनिवार्य कर दिया है। इस नियम का पालन करने के लिए IOC ने यह बड़ा कदम उठाया है।
Indian Oil कैसे बनयेगा Sustainable Aviation Fuel?
IOC की पानीपत रिफाइनरी इस्तेमाल किए गए खाने के तेल (Used Cooking Oil – UCO) को इकट्ठा करके उसे SAF में बदलेगी। इसके लिए कंपनी होटल चेन, रेस्टॉरेंट्स और हल्दीराम जैसी बड़ी कंपनियों से यह तेल खरीदेगी। साहनी के अनुसार, 2024 के अंत तक यह रिफाइनरी सालाना 35,000 टन SAF का उत्पादन शुरू कर देगी, जो 2027 तक 1% अनिवार्य मिश्रण की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।
घरों से तेल इकट्ठा करने की चुनौती
वर्तमान में, यूको (UCO) को एजेंसियों द्वारा इकट्ठा कर निर्यात किया जाता है। साहनी ने कहा कि “भारत में इस तेल की भारी मात्रा उपलब्ध है, लेकिन इसे इकट्ठा करना मुख्य चुनौती है।” बड़े होटल्स और रेस्टॉरेंट्स से तेल जमा करना आसान है, लेकिन घरों से इसे इकट्ठा करने के लिए एक व्यवस्थित समाधान ढूंढना होगा।
पर्यावरण के लिए बड़ा कदम
SAF का उपयोग हवाई उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकता है। यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बनता है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी। IOC का यह प्रयास भारत के Net-Zero उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
इंडियन ऑयल का यह प्रोजेक्ट भारत में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। अगर यह योजना सफल रही, तो भविष्य में विमानन उद्योग अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बन सकेगा।
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