Make in India की ताकत: भारत में बनेगा Rafale, डसॉल्ट-टाटा की डील से खुलेंगे नए रास्ते

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Make in India को नई उड़ान: डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने भारत में राफेल फाइटर जेट के पार्ट्स निर्माण के लिए 4 अहम समझौते किए। जानें इस डील से जुड़े फायदे और असर।

लखनऊ 5 जून 2025: भारत के रक्षा क्षेत्र में Make In India पहल को नई ऊंचाई देते हुए डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने भारत में राफेल लड़ाकू विमानों के बॉडी पार्ट्स के निर्माण को लेकर चार प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता स्वदेशी रक्षा उत्पादन, तकनीकी आत्मनिर्भरता, और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी को और मजबूत करेगा।

‘Make In India’ को मिलेगा नया पंख

इन समझौतों के तहत भारत में राफेल विमान के महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल पार्ट्स और कंपोनेंट्स का निर्माण किया जाएगा। इसका सीधा लाभ देश के एयरोस्पेस निर्माण कौशल को मिलेगा और भारत को विश्व स्तरीय लड़ाकू विमान निर्माण हब बनने में मदद मिलेगी।

यह समझौता न केवल “Make in India” मिशन को मजबूती देगा बल्कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाएगा। इससे भविष्य में भारत राफेल जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के डिजाइन, उत्पादन और निर्यात की दिशा में आत्मनिर्भर बन सकेगा।

4 प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट के जरिए क्या बदलेगा?

  1. राफेल के शरीर (फ्यूसलाज) और डिफेंस कंपोनेंट्स का निर्माण भारत में
  2. तकनीक और डिज़ाइन ट्रांसफर की सुविधा
  3. टाटा ग्रुप के हैदराबाद प्लांट में उत्पादन की शुरुआत
  4. ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की सीधी भागीदारी

यह समझौते राफेल के भविष्य के अपग्रेडेशन, निर्यात और अन्य देशों के लिए निर्माण की संभावनाएं भी खोलते हैं।

तकनीकी ट्रांसफर का लाभ

इन समझौतों से उन्नत एविएशन तकनीक का ट्रांसफर होगा। भारत के इंजीनियरों और तकनीशियनों को डसॉल्ट जैसी हाई-टेक कंपनी से प्रशिक्षण प्राप्त होगा, जिससे देश में स्किल डेवलपमेंट को भी बल मिलेगा।

Make in India: आंकड़ों में उड़ान

  • 2015 में शुरू हुआ Make in India अब तक 27 सेक्टरों में लागू किया गया है।
  • रक्षा क्षेत्र में पिछले 5 वर्षों में 12 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है।
  • 2024 तक 75% रक्षा उत्पादन स्वदेशी करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • भारत पहले ही 400+ रक्षा आइटम का आयात प्रतिबंध सूची में डाल चुका है।

डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के बीच हुआ यह समझौता केवल एक औद्योगिक करार नहीं है, बल्कि यह भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र में संपूर्ण परिवर्तन का सूत्रपात है। यह भारत को एक मजबूत रक्षा विनिर्माण हब बनाने की दिशा में एक ठोस और ऐतिहासिक कदम है।

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